मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग की ओर मार्च निकाला। खास बात यह रही कि Biju Janata Dal यानी BJD के सांसद भी इस SIR Protest में शामिल हुए, जबकि पार्टी खुद को INDIA गठबंधन और NDA दोनों से अलग बताती रही है।
मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग कार्यालय तक पहुंचने से पहले रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
नवीन पटनायक के निर्देश पर प्रदर्शन में शामिल हुई BJD
राज्यसभा में BJD संसदीय दल के नेता मानस मंगराज के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर सांसदों ने SIR Protest में हिस्सा लिया।
BJD इससे पहले भी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुकी है और नवीन पटनायक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटने के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि BJD के इस प्रदर्शन में शामिल होने को INDIA गठबंधन में शामिल होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा मुद्दा है।
ओडिशा में करीब 20 लाख नाम हटे
SIR को लेकर BJD की सबसे बड़ी आपत्ति ओडिशा की मतदाता सूची को लेकर है।
ओडिशा में SIR पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में पहले के मुकाबले करीब 20 लाख नाम कम हुए। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन के मुताबिक SIR से पहले करीब 3.34 करोड़ मतदाता थे और अंतिम सूची में यह संख्या करीब 3.16 करोड़ रही।
हालांकि हर हटाए गए नाम को अनियमितता मानना सही नहीं होगा। चुनाव अधिकारियों के अनुसार draft stage में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी मिले थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जो दूसरी जगह चले गए थे या जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज थे।
BJD ने इसके विपरीत आरोप लगाया है कि कई वास्तविक मतदाता भी सूची से बाहर हुए हैं।
धामनगर में 227 वोट हटाने का आरोप
BJD ने भद्रक जिले के धामनगर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया है कि एक क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के 227 मतदाताओं के नाम संबंधित Booth Level Officers की जानकारी के बिना हटाए गए।
पार्टी ने सितंबर में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस संबंध में शिकायत भी दी थी।
यह फिलहाल BJD का आरोप है। चुनाव आयोग या अदालत ने इसे किसी सुनियोजित तरीके से मतदाता हटाने का प्रमाणित मामला घोषित नहीं किया है।
13 करोड़ नाम हटने का दावा
इस SIR Protest के दौरान BJD और दूसरे विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि देशभर में SIR के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम प्रभावित या हटाए गए हैं।
यह आंकड़ा विपक्ष की ओर से पेश किया जा रहा है और इसे चुनाव आयोग द्वारा देशव्यापी अवैध deletion की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि व्यापक deletions से वास्तविक मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ा है, जबकि चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि voter rolls की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई है।
Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
SIR विवाद को सुप्रीम कोर्ट में Form 6 को लेकर हुई हालिया सुनवाई ने और तेज कर दिया है।
5 अक्टूबर को Chief Justice of India सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने Modified Form 6 को मंजूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड और जवाब मांगा है।
इसी टिप्पणी को आधार बनाकर विपक्ष ज्ञानेश कुमार पर हमला कर रहा है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि Form 6 में बदलाव गैरकानूनी था या CEC ने व्यक्तिगत रूप से कानून का उल्लंघन किया। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।
ओडिशा CEO के VRS पर भी राजनीति
BJD नेताओं ने ओडिशा के Chief Electoral Officer आरएस गोपालन के VRS आवेदन को भी SIR विवाद से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
गोपालन ने 1 अक्टूबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। हालांकि उन्होंने खुद स्पष्ट किया है कि उनका फैसला व्यक्तिगत और स्वास्थ्य कारणों से है और इसका SIR विवाद से कोई संबंध नहीं है।
इसलिए VRS को SIR में कथित गड़बड़ी का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।
दिल्ली में रोका गया विपक्ष का मार्च
मंगलवार का SIR Protest संसद परिसर से Election Commission की ओर बढ़ा था। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच विपक्षी सांसदों को रास्ते में रोक दिया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सैकड़ों सांसद चुनाव आयोग से सवाल पूछना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। कई विपक्षी सांसदों और नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया।
BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शन के जरिए संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
BJD के शामिल होने से बढ़ा राजनीतिक महत्व
इस प्रदर्शन की सबसे अहम राजनीतिक बात BJD की भागीदारी रही।
पार्टी ने साफ किया है कि वह NDA या INDIA गठबंधन में शामिल होने के लिए यह कदम नहीं उठा रही, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताओं के कारण विरोध में शामिल हुई है।
ऐसे में SIR Protest अब केवल INDIA गठबंधन और चुनाव आयोग के बीच टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। नवीन पटनायक की BJD के मैदान में उतरने से CEC ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई का दायरा और बढ़ गया है।
अब निगाह सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले और चुनाव आयोग के जवाब पर रहेगी। कोर्ट ने अभी SIR या Form 6 विवाद पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, इसलिए विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष की कानूनी जांच आगे की सुनवाई में अहम होगी।

