Indore Flats Demolition: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित गांधीनगर क्षेत्र में गरीब परिवारों के लिए बनाए गए 2024 फ्लैटों को तोड़कर नए सिरे से निर्माण करने की योजना तैयार की गई है। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (JNNURM) के तहत वर्ष 2010 में बनी इन बहुमंजिला इमारतों की हालत जर्जर होने के कारण यह कदम उठाने की तैयारी है।
इन फ्लैटों में सीपी शेखर नगर, साउथ तोड़ा और भूरी टेकरी के परिवारों को बसाया गया था। अब नगर निगम ने पुरानी इमारतों को हटाकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
इस योजना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नए आवास में दोबारा बसने के लिए पात्र परिवारों को कथित तौर पर 2 लाख रुपये देने होंगे। जो लोग निर्धारित राशि जमा नहीं करेंगे, उन्हें नए फ्लैट आवंटित नहीं किए जाने की बात कही गई है। इससे उन परिवारों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है, जिनके लिए ये आवास बनाए गए थे।
सितंबर के हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई
गांधीनगर की इन इमारतों की स्थिति पर सितंबर में हुई एक घटना के बाद गंभीर सवाल उठे थे। जानकारी के मुताबिक, 13 सितंबर की रात एक चार मंजिला इमारत के भूतल पर स्थित फ्लैट में जमीन अचानक धंस गई थी। घटना के दौरान वहां रहने वाले कन्हैया खराटे और उनका परिवार प्रभावित हुआ था। फ्लैट के भीतर जमीन में करीब एक से दो फीट गहरा गड्ढा बन गया था।
घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद इमारतों की स्थिति का आकलन किया गया और उन्हें तोड़कर दोबारा बनाने की जरूरत पर विचार शुरू हुआ।
इस घटना ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चिंता बढ़ा दी। हालांकि, जमीन धंसने के वास्तविक कारणों का निर्धारण तकनीकी जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
पीपीपी मॉडल पर बनेंगी नई इमारतें
नगर निगम ने पुरानी बिल्डिंगों के स्थान पर नई आवासीय इमारतें बनाने के लिए पीपीपी मॉडल का प्रस्ताव तैयार किया है। इस मॉडल के तहत निजी बिल्डर निर्माण करेगा और परियोजना के बदले उसे व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है।
योजना का उद्देश्य जर्जर हो चुके आवासों को बदलकर रहवासियों को सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव के मुताबिक, परियोजना के लिए नगर निगम को सीधे निर्माण खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। हालांकि, योजना का अंतिम स्वरूप संबंधित मंजूरियों और स्वीकृत शर्तों पर निर्भर करेगा।
नई इमारतों का निर्माण शुरू होने से पहले मौजूदा निवासियों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा। निर्माण पूरा होने के बाद पात्र परिवारों को दोबारा आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी नगर निगम की जिम्मेदारी होगी।
नए घर के लिए देने होंगे 2 लाख रुपये
Indore Flats Demolition योजना में रह रहे परिवारों के लिए दो लाख रुपये की राशि एक अहम मुद्दा बन गई है। अधिकारियों के अनुसार, नई बिल्डिंग में फ्लैट आवंटित करने से पहले पात्र रहवासियों से यह राशि ली जाएगी। यह व्यवस्था राज्य सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार लागू किए जाने की बात कही गई है।
जानकारी के मुताबिक, पहले इन परिवारों को वन बीएचके फ्लैट लगभग 1.80 लाख रुपये में आवंटित किए गए थे। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कई निवासियों ने आवंटन के बाद भी राशि जमा नहीं की।
ऐसे में नई योजना के तहत भुगतान की शर्त उन परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। योजना लागू होने से पहले भुगतान की शर्तों, पात्रता और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उपलब्ध सहायता को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
रखरखाव की कमी या निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल?
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि नियमित रखरखाव नहीं होने से इमारतों की हालत खराब हुई। अधिकारियों के अनुसार, रहवासियों को सामूहिक रूप से रखरखाव की व्यवस्था करने और रहवासी संघ बनाने की सलाह दी गई थी, लेकिन अपेक्षित व्यवस्था नहीं बन पाई।
दूसरी ओर, कुछ निवासियों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इमारतों में निर्माण संबंधी कमियां थीं। ऐसे में यह मामला केवल रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच भी जरूरी बनाती है।
विशेषज्ञ जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि इमारतों की खराब स्थिति के पीछे संरचनात्मक कमियां, जमीन की स्थिति, रखरखाव की कमी या अन्य कारणों की कितनी भूमिका रही।
महापौर और अधिकारियों की चर्चा के बाद तैयार हुआ प्रस्ताव
पुरानी इमारतों की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय आवास एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे से चर्चा की थी। इसके बाद जर्जर इमारतों को हटाकर नए आवास बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ाया गया।
फिलहाल प्रस्ताव की मंजूरी, पुनर्वास की प्रक्रिया और निर्माण की समयसीमा जैसे पहलुओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। निवासियों के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि नए घर बनने तक उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था बनी रहे।
गरीब परिवारों के सामने पुनर्वास की चुनौती
गांधीनगर में प्रस्तावित Indore Flats Demolition योजना का उद्देश्य पुराने और असुरक्षित आवासों की जगह नई इमारतें बनाना है। लेकिन परियोजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मौजूदा परिवारों को समय पर सुरक्षित स्थान मिले और पुनर्वास की शर्तें स्पष्ट रहें।
दो लाख रुपये की राशि, पुराने आवंटन का बकाया, नई इमारतों की गुणवत्ता और पुनर्वास की व्यवस्था इस परियोजना के प्रमुख मुद्दे होंगे। अंतिम मंजूरी और विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन परिवारों को किस प्रक्रिया के तहत नए फ्लैट मिलेंगे।

