Visit My State Varanasi: उत्तर प्रदेश पर्यटन की ‘Visit My State’ पहल के तहत करीब 50 महिला उद्यमी, निवेशक और डिजिटल क्रिएटर्स वाराणसी पहुंचे हैं। तीन दिवसीय familiarisation journey का उद्देश्य काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखकर यहां की कारीगरी, खानपान, स्थानीय समुदाय और आजीविका से जोड़ना है। कार्यक्रम 7 से 9 अक्टूबर तक Lucknow, Varanasi और Sarnath को जोड़ते हुए आयोजित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन ने FICCI FLO के साथ मिलकर इस यात्रा की योजना बनाई है। इसमें fashion, sustainable design, hospitality, travel, education, wellness और digital communication जैसे क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं। विभाग का लक्ष्य है कि प्रतिभागियों के अनुभव आगे उनके professional networks और digital platforms के जरिए नए यात्रियों और संभावित बाजारों तक पहुंचें।

Visit My State Varanasi: घाटों से करघों तक काशी को समझने की कोशिश
यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा आरती, sunrise cruise, रामनगर किला, स्थानीय खानपान और Banarasi handloom community से परिचित कराया जा रहा है।
इस पहल में खास जोर इस बात पर है कि पर्यटक किसी शहर को केवल उसके स्मारकों या धार्मिक स्थलों के जरिए न देखें, बल्कि उस शहर की जीवित परंपराओं और उनके पीछे काम करने वाले लोगों को भी समझें।
काशी में गंगा, मंदिर, खानपान और बुनकरी को एक ही tourism experience का हिस्सा बनाकर पेश करने की योजना है।
Visit My State Varanasi: बनारसी साड़ी के पीछे की पूरी प्रक्रिया समझी
यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनारसी बुनकरों और handloom entrepreneurs के साथ संवाद है।
प्रतिभागियों को बताया गया कि एक Banarasi saree तैयार होने में design और dyeing से लेकर weaving, zari work, finishing और retail तक कई स्तरों पर अलग-अलग लोगों का कौशल जुड़ा होता है। कार्यक्रम में बुनकरों, कारोबारियों और handloom sector से जुड़े लोगों के साथ सीधे संवाद के जरिए इस पूरी livelihood chain को समझने पर जोर दिया गया है।
इससे प्रतिभागियों को तैयार साड़ी के साथ उस श्रम और पारंपरिक तकनीक के बारे में भी जानने का अवसर मिला, जो बनारसी वस्त्र उद्योग की पहचान है।
Visit My State Varanasi: ‘Saree Back in Fashion’ पर भी फोकस
‘Visit My State’ यात्रा को Saree Back in Fashion पहल से भी जोड़ा गया है।
Fashion, design, sustainability और retail क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिभागी इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि पारंपरिक बनारसी साड़ियों को contemporary daily wear, corporate wear और formal fashion में किस तरह ज्यादा जगह दिलाई जा सकती है।
इस दौरान styling ideas, lookbooks, sourcing connections और digital promotion जैसे विषयों पर भी फोकस रखा गया है।
इस तरह यात्रा केवल tourism promotion तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनकरों और संभावित buyers, designers तथा market influencers के बीच सीधे connections तैयार करने की कोशिश भी है।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार के बीच नया कनेक्शन
Visit My State Varanasi का एक प्रमुख उद्देश्य tourism visibility को स्थानीय आजीविका में बदलना है।
महिला उद्यमियों और निवेशकों के स्थानीय artisans से सीधे जुड़ने से sourcing और business collaborations की संभावनाएं बन सकती हैं। वहीं digital creators काशी के घाटों, बुनकरों, खानपान, धार्मिक स्थलों और cultural practices से जुड़ी कहानियां नए audience तक पहुंचा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश पर्यटन का मानना है कि इससे यात्रियों को शहर में ज्यादा समय बिताने के लिए प्रेरित किया जा सकता है और पर्यटन से पैदा होने वाला आर्थिक लाभ guides, boatmen, artisans, food businesses और अन्य स्थानीय stakeholders तक पहुंच सकता है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार tourism experiences को उन लोगों और परंपराओं से जोड़ने पर काम कर रही है जो किसी destination की वास्तविक पहचान बनाते हैं।
उनके मुताबिक ‘Visit My State’ के जरिए tourism से मिलने वाली visibility को लंबे stay, मजबूत markets और weavers, artisans, guides, boatmen तथा food businesses के लिए नए अवसरों में बदलने का प्रयास है।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने भी कहा कि किसी destination को प्रत्यक्ष रूप से समझने से उसकी कहानी अधिक विश्वसनीय तरीके से सामने रखी जा सकती है।
Visit My State Varanasi: 9 अक्टूबर को सारनाथ में होगा समापन
तीन दिवसीय यात्रा का अंतिम पड़ाव सारनाथ होगा।
प्रतिभागियों को Dhamek Stupa, Chaukhandi Stupa, Mulagandha Kuti Vihara और Archaeological Museum जैसे प्रमुख स्थलों से परिचित कराने की योजना है। इसके जरिए उन्हें वाराणसी के आसपास मौजूद Buddhist tourism potential और Uttar Pradesh Buddhist Circuit को समझने का मौका मिलेगा।
सारनाथ को लेकर एक बड़ा बदलाव इसी साल हुआ है। UNESCO ने Ancient Buddhist Site of Sarnath को 2026 में World Heritage List में शामिल किया। UNESCO के मुताबिक इसमें Chaukhandi Stupa और Sarnath के archaeological remains शामिल हैं।
बौद्ध परंपरा में सारनाथ वह स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। UNESCO ने इसे criteria (iii) और (vi) के तहत World Heritage Site का दर्जा दिया है।
अनुभवों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक ले जाने की योजना
कार्यक्रम का उद्देश्य तीन दिन की यात्रा खत्म होने के साथ समाप्त नहीं होगा।
पर्यटन विभाग की योजना है कि प्रतिभागी यहां से मिले अनुभवों और कहानियों को अपने business networks, consumer communities और digital platforms तक ले जाएं। इससे काशी और सारनाथ के पर्यटन को नए audience तक पहुंचाने के साथ स्थानीय artisans को भी संभावित customers और collaborators से जोड़ने का अवसर मिल सकता है।
‘Visit My State’ पहल इसी मॉडल के जरिए tourism promotion को स्थानीय livelihoods के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है।
काशी के संदर्भ में इसका फोकस साफ है—घाट और मंदिर जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही वे लोग भी हैं जो सदियों पुरानी बनारसी बुनकरी, खानपान और दूसरी जीवित परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में करीब 50 महिला उद्यमियों, निवेशकों और digital creators की यह यात्रा केवल sightseeing नहीं, बल्कि काशी की heritage economy और नए बाजारों के बीच संबंध बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

