Ram Mandir Donation Dispute Row: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारत हिंदू महासभा की एक याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ 2 नवंबर 2026 को सुनने का फैसला किया है। नई याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका में मंदिर निर्माण के लिए मिले दान के कथित दुरुपयोग और राम मंदिर के आसपास जमीन की खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर उसका नए सिरे से गठन करने की मांग भी की गई है। ये याचिकाकर्ता के आरोप और मांगें हैं; सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन आरोपों को सही नहीं ठहराया है।
Ram Mandir Donation Dispute Row में 2 नवंबर क्यों अहम?
इस विवाद से जुड़ी कई याचिकाएं पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। 21 सितंबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने जांच की प्रगति पर विस्तृत SIT रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया था और सभी मामलों को आगे की सुनवाई के लिए 2 नवंबर को सूचीबद्ध किया था।
अब अखिल भारत हिंदू महासभा की नई याचिका को भी उसी batch के साथ जोड़कर सुना जाएगा।
इसका मतलब यह है कि 2 नवंबर की सुनवाई सिर्फ चंपत राय के खिलाफ नई याचिका तक सीमित नहीं होगी, बल्कि राम मंदिर के दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ियों से जुड़े व्यापक मामलों पर भी अदालत विचार कर सकती है।
Ram Mandir Donation Dispute: चंपत राय पर नई याचिका में क्या आरोप?
नई याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण और संचालन से जुड़े दान में कथित अनियमितताएं हुईं और मंदिर के आसपास जमीन की खरीद में भी गैरकानूनी गतिविधियां हुईं।
याचिकाकर्ता ने पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा ट्रस्ट के मौजूदा ढांचे को खत्म कर पूरी तरह पुनर्गठित करने की मांग भी की गई है।
हालांकि इन आरोपों को वर्तमान SIT जांच में चंपत राय के खिलाफ साबित आरोपों के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
Ram Mandir Donation Dispute: SIT जांच में चंपत राय को क्या मिला?
इस मामले का यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित SIT की जांच में चंपत राय को donation theft के मामले में आरोपी नहीं बनाया गया। अगस्त में सामने आई जांच रिपोर्ट के मुताबिक उनके खिलाफ कथित चोरी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता का सबूत नहीं मिला।
सितंबर में दाखिल चार्जशीट में आठ counting agents और employees को आरोपी बनाया गया, जबकि चंपत राय को prosecution witness के रूप में रखा गया। जांच के अनुसार उन्हें कथित गड़बड़ी की शुरुआती जानकारी फोन कॉल और वीडियो के जरिए मिली थी, जिसके बाद CCTV देखने और पुलिस शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
इसलिए headline या खबर में यह नहीं लिखा जाना चाहिए कि मौजूदा SIT ने चंपत राय को दान चोरी का आरोपी पाया है।
Ram Mandir Donation Dispute: चंपत राय अब ट्रस्ट महासचिव नहीं
Ram Mandir Donation Dispute Row में एक और जरूरी तथ्य उनकी वर्तमान भूमिका से जुड़ा है।
चंपत राय ने विवाद के बीच पद से इस्तीफा दिया था और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 6 जुलाई 2026 को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई।
इसलिए उन्हें मौजूदा महासचिव लिखने के बजाय “ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय” लिखना सही होगा।
Ram Mandir Donation Dispute: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कैसे आगे बढ़ी जांच?
जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था। अदालत ने SIT से status report भी मांगी थी।
बाद में कोर्ट ने जांच को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए independent forensic auditor को शामिल करने का निर्देश दिया। सितंबर की SIT रिपोर्ट के मुताबिक ASA & Associates LLP को forensic auditor के तौर पर जांच से जोड़ा गया।
Ram Mandir Donation Dispute: SIT रिपोर्ट में क्या मिला?
21 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट आदेश में SIT की जांच के कई महत्वपूर्ण बिंदु दर्ज हैं।
जांच में CCTV footage, bank records, property documents, mobile data, call detail records, witness statements और forensic material की पड़ताल की गई। रिपोर्ट के मुताबिक counting room की CCTV जांच में 105 instances ऐसे सामने आए जिनमें currency के unauthorized removal या concealment का संदेह मिला।
SIT ने आठ आरोपियों की भूमिका की पहचान की और उनके खातों में unexplained deposits तथा संपत्तियों की भी जांच की।
वहीं 803 मूल्यवान दान की वस्तुओं के रिकॉर्ड की जांच में कोई discrepancy नहीं मिली। कुछ अन्य चर्चित चांदी और valuables से जुड़े सोशल मीडिया तथा मीडिया दावों की भी जांच की गई और उन विशेष वस्तुओं के verification में भी discrepancy नहीं मिलने की बात कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज है।
Ram Mandir Donation Dispute: 173 गवाहों के बयान दर्ज
सितंबर की SIT status report के अनुसार 14 सितंबर तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे।
इनमें ट्रस्ट के पदाधिकारी, accounting personnel, bank officials, security staff, CCTV operators, chartered accountants, vendors और property transactions से जुड़े लोग शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि charge sheet दाखिल होने के बाद भी यदि कोई नया सबूत सामने आता है तो कानून के तहत आगे की जांच जारी रह सकती है।
Ram Mandir Donation Dispute: 2 नवंबर की सुनवाई में अब क्या होगा?
अब Ram Mandir Donation Dispute Row में 2 नवंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
अदालत पहले से लंबित donation-related petitions के साथ अखिल भारत हिंदू महासभा की नई याचिका भी सुनेगी। नई याचिका में चंपत राय और अन्य के खिलाफ कार्रवाई तथा ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग है, जबकि मौजूदा SIT जांच में चंपत राय donation-theft case के आरोपी नहीं हैं।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को एक तरफ मौजूदा SIT और forensic audit के निष्कर्ष देखने होंगे, जबकि दूसरी तरफ नई याचिका में उठाए गए अलग आरोपों और मांगों पर यह तय करना होगा कि आगे किसी अतिरिक्त जांच या कानूनी निर्देश की जरूरत है या नहीं।
फिलहाल चंपत राय के खिलाफ नई याचिका में लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। किसी याचिका में आरोप लगाया जाना अपने-आप दोष या आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करता।

