Meerut Blue Drum Murder Case में मेरठ की जिला अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी ठहराया गया था। इस मामले में 30 सितंबर को दोषसिद्धि का फैसला आया था, जबकि सजा पर निर्णय सुरक्षित रखा गया था।
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब सौरभ का शव मेरठ स्थित उनके घर में नीले ड्रम के भीतर मिला। जांच में सामने आया कि शव को टुकड़ों में काटकर ड्रम में रखा गया था और उसे सीमेंट से छिपाने की कोशिश की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
Meerut Blue Drum Murder Case: सजा सुनाए जाने से पहले क्या हुआ?
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। अदालत ने दोनों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी और परिवार के बारे में सवाल किए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब मुस्कान से सजा सुनाए जाने से पहले कुछ कहने के लिए पूछा गया, तो उसने अपनी बेटी का ख्याल रखने की अपील की। इसके बाद अदालत ने दोनों के मामले में सजा का ऐलान किया।
बचाव पक्ष ने क्यों की कम सजा की मांग?
मुस्कान और साहिल की ओर से पेश बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से मृत्युदंड के बजाय कम सजा देने की अपील की। दलील में मुस्कान की पारिवारिक परिस्थितियों, उसकी बेटियों और बुजुर्ग माता-पिता का हवाला दिया गया।
बचाव पक्ष का तर्क था कि मृत्युदंड देने के लिए मामले को कानून के तहत निर्धारित अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में आना चाहिए। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता, हत्या के तरीके और सबूत छिपाने की कोशिश को कठोरतम सजा का आधार बताया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मृत्युदंड का आदेश दिया।
सौरभ के परिवार ने की थी कड़ी सजा की मांग
सौरभ राजपूत के परिवार की ओर से अदालत में दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की गई थी। अभियोजन पक्ष ने भी कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए ऐसी सजा जरूरी है, जो कानून के प्रति लोगों का भरोसा बनाए रखे।
सौरभ की हत्या के बाद उनके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी। अदालत के फैसले के साथ मामले में सजा का चरण पूरा हुआ है, हालांकि मृत्युदंड के मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे। मामले की जांच के अनुसार, वह फरवरी 2025 में विदेश से भारत लौटे थे। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 3 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल ने मिलकर उनकी हत्या की।
जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, सौरभ को पहले बेहोश किया गया और फिर धारदार हथियार से हमला किया गया। इसके बाद शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में रखे गए और सीमेंट से छिपाने की कोशिश की गई।
यह मामला तब सार्वजनिक रूप से चर्चा में आया, जब पुलिस जांच के दौरान नीले ड्रम से शव बरामद हुआ। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया और मामले की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।
22 गवाहों और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर चला मुकदमा
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। मुकदमे की सुनवाई करीब 13 महीने चली और इस दौरान 100 से अधिक सुनवाइयां हुईं। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट और फॉरेंसिक तथ्यों पर विचार किया।
30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से सजा पर बहस हुई और 14 अक्टूबर को मृत्युदंड का आदेश सुनाया गया।
मृत्युदंड के बाद आगे क्या होगा?
Meerut Blue Drum Murder Case में अदालत का मृत्युदंड संबंधी आदेश आने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया के कुछ चरण शेष रह सकते हैं। भारतीय कानून के तहत सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए भेजा जाता है। दोषियों को कानून के अनुसार अपील करने का अधिकार भी होता है।
इसलिए अदालत के आदेश और सजा के अंतिम क्रियान्वयन को अलग-अलग समझना जरूरी है। आगे की प्रक्रिया उच्च न्यायालय और संबंधित न्यायिक आदेशों के अनुसार चलेगी।

