बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार, 11 अक्टूबर को बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर परिसर में आयोजित ‘शिक्षा की उड़ान’ कार्यक्रम के दौरान बालिका शिक्षा और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को लेकर बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में स्कूल में दाखिला लेने वाली हर पांचवीं बेटी बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती थी। उनके मुताबिक, इसकी प्रमुख वजहों में स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय और साफ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन समस्याओं की पहचान के बाद स्कूलों में जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर काम किया गया। उन्होंने बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराने के साथ सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया।
Yogi Adityanath ने बताई बेटियों के पढ़ाई छोड़ने की वजह
मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले यह माना जाता था कि स्कूल घर से दूर होने के कारण बेटियां पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं। लेकिन जब कारणों की पड़ताल की गई, तो कई विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय और साफ पानी की व्यवस्था जैसी बुनियादी कमियां सामने आईं।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं की कमी छात्राओं की शिक्षा में बाधा बन रही थी। इसके बाद स्कूलों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
हालांकि, ‘हर पांचवीं बेटी’ का आंकड़ा मुख्यमंत्री के संबोधन में दिया गया है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में इस आंकड़े के मूल सर्वेक्षण या स्वतंत्र सांख्यिकीय अध्ययन का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
60 से 70 प्रतिशत बेटियों के पास नहीं थे जूते
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बच्चों की आर्थिक स्थिति और स्कूल जाने के दौरान आने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले करीब 60 से 70 प्रतिशत बेटियां नंगे पैर स्कूल जाती थीं। कई बच्चों के पास सर्दियों में पहनने के लिए स्वेटर तक नहीं होते थे।
सीएम के मुताबिक, बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि शिक्षा में आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बननी चाहिए और प्रत्येक बच्चे को स्कूल में पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें और जूते-मोजे
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 1.60 करोड़ स्कूली बच्चों को हर साल दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, स्वेटर और जूते-मोजे सहित जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, फर्श और फर्नीचर जैसी सुविधाओं में सुधार किया गया है।
सीएम ने कहा कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है, ताकि बच्चे आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कर सकें। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
‘शिक्षा की उड़ान’ कार्यक्रम में बच्चों को मिली स्टडी टेबल
बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना भी रहा। मुख्यमंत्री ने विभिन्न परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्टडी टेबल, आशीर्वाद पत्र और पढ़ाई की सामग्री देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्त और जिला प्रशासन की ओर से संचालित इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम में बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर दिया गया। स्टडी टेबल मिलने से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए एक व्यवस्थित जगह उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
बेटियों की शिक्षा और स्कूलों की सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक तंगी या बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए। स्कूलों में शौचालय, पेयजल, जरूरी शैक्षणिक सामग्री और बेहतर पढ़ाई का माहौल उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बलरामपुर में ‘शिक्षा की उड़ान’ कार्यक्रम के दौरान दिए गए संबोधन में बालिका शिक्षा, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास प्रमुख रहे। मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के विस्तार और बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की बात कही।

