Indian Railway News: जयपुर जंक्शन पर महिला यात्रियों की सुरक्षा और आरक्षित कोचों में नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। बुधवार को तीन घंटे तक आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों के महिला आरक्षित डिब्बों की पड़ताल में पुरुष यात्रियों के सवार होने और सीटों पर कब्जा जमाने के मामले सामने आए। कुछ जगह महिलाओं की तुलना में पुरुष यात्रियों की संख्या अधिक दिखाई दी। इस दौरान एक महिला यात्री के विरोध के बावजूद एक पुरुष के कोच में चढ़ने की बात भी सामने आई।
इस पड़ताल के अनुसार, भीड़ को महिला आरक्षित कोच में प्रवेश करने का बहाना बनाया जा रहा है। रेलवे के नियमों के बावजूद ऐसी स्थिति सामने आना निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करता है।
Indian Railway News: जयपुर जंक्शन पर महिला कोचों की पड़ताल में क्या मिला?
जयपुर जंक्शन पर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों के महिला आरक्षित कोचों में यात्रियों की स्थिति देखी गई। पड़ताल में तीन ट्रेनों में पुरुष यात्रियों की मौजूदगी विशेष रूप से सामने आई।
जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन: दोपहर करीब पौने दो बजे प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर खड़ी ट्रेन के महिला कोच में लगभग तीन महिलाएं और 10 से 15 पुरुष यात्री सवार बताए गए। कुछ पुरुष सीटों पर लेटे हुए थे, जबकि कुछ महिला यात्रियों के पास बैठे थे।
जोधपुर-वाराणसी ट्रेन: प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंची इस ट्रेन के महिला आरक्षित कोच में भी पुरुष यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला ने एक पुरुष यात्री को कोच में चढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद कुछ अन्य युवक भी कोच में सवार हो गए।
श्रीगंगानगर-बठिंडा-अंबाला ट्रेन: प्लेटफॉर्म नंबर-1बी पर खड़ी ट्रेन के महिला कोच में चार-पांच महिलाओं के मुकाबले अधिक पुरुष यात्री मौजूद बताए गए। गेट के पास भी भीड़ थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मौके पर आरपीएफ कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद तत्काल रोक-टोक नहीं की गई।
ये घटनाएं महिला यात्रियों के लिए आरक्षित स्थानों पर नियमों के पालन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता की ओर ध्यान दिलाती हैं।
रेलवे अधिनियम की धारा 162 में क्या है प्रावधान?
महिला यात्रियों के लिए आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने या वहां यात्रा करने पर रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 162 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
रिपोर्ट में जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये किए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, जुर्माने की वर्तमान लागू राशि और संबंधित नियमों की पुष्टि आधिकारिक रेलवे अधिसूचना से की जानी चाहिए।
नियमों का उद्देश्य महिला यात्रियों के लिए आरक्षित स्थान की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है। केवल नियम मौजूद होना पर्याप्त नहीं है; उनका प्रभावी पालन, नियमित जांच और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई भी जरूरी है।
कई ट्रेनों में महिला कोच की व्यवस्था पर भी सवाल
पड़ताल में वाराणसी-साबरमती-लखनऊ और उदयपुर-जयपुर ट्रेनों में अलग महिला आरक्षित कोच नहीं मिलने का भी उल्लेख किया गया है। इस तरह की स्थिति में यात्रियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि संबंधित ट्रेन में महिला आरक्षण की व्यवस्था किस रूप में उपलब्ध है।
कोचों की व्यवस्था ट्रेन और उसके निर्धारित रेक के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी ट्रेन में अलग महिला डिब्बा नहीं दिखने का अर्थ अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं है। इसके लिए रेलवे की आधिकारिक कोच संरचना और आरक्षण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।
रिपोर्ट में दिव्यांग यात्रियों के लिए निर्धारित कोचों में भी सामान्य यात्रियों के सफर करने की बात कही गई है। यदि ऐसा होता है, तो इससे उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है, जिनके लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
महिला कोच में पुरुष यात्री दिखें तो क्या करें?
रेलवे यात्रा के दौरान महिला आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश दिखाई देने पर यात्री इन माध्यमों से शिकायत कर सकते हैं:
- रेलवे हेल्पलाइन 139: रेलवे सहायता और शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क करें।
- रेल मदद पोर्टल: RailMadad पर शिकायत दर्ज कराएं।
- आरपीएफ या जीआरपी: ट्रेन में तैनात सुरक्षा कर्मियों या रेलवे स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों को सूचना दें।
- टीटीई: संबंधित ट्रेन के टिकट जांच कर्मचारी को स्थिति से अवगत कराएं।
महिला यात्रियों को अनधिकृत यात्रियों से अकेले बहस करने या टकराव बढ़ाने के बजाय रेलवे कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की मदद लेनी चाहिए।
पिछले महीने जयपुर जंक्शन पर 31 मामले दर्ज होने का दावा
रिपोर्ट में रेलवे सुरक्षा बल के हवाले से बताया गया है कि जयपुर जंक्शन पर पिछले महीने महिला आरक्षित कोचों में अनधिकृत प्रवेश के 31 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या पिछले महीनों की तुलना में लगभग दोगुनी बताई गई है।
अधिकारी के अनुसार, नियमित जांच के दौरान भी ऐसे मामले सामने आते हैं और शिकायतों की संख्या कम होने के बावजूद कार्रवाई की जाती है। त्योहारी सीजन को देखते हुए विशेष अभियान चलाने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि और कार्रवाई का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर ही यह आकलन किया जा सकेगा कि समस्या कितनी व्यापक है और निगरानी व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है।
महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए निगरानी जरूरी
जयपुर जंक्शन की पड़ताल ने महिला आरक्षित कोचों में नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। भीड़ के कारण होने वाली असुविधा को महिला यात्रियों के आरक्षित स्थान पर अनधिकृत कब्जे का आधार नहीं बनाया जा सकता।
रेलवे के लिए नियमित जांच, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और यात्रियों को नियमों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। साथ ही, यात्रियों को भी आरक्षित कोचों के नियमों का पालन करना चाहिए।

