Why Stock Market Rise Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,533 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,315 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 374 अंक यानी 1.66 प्रतिशत चढ़कर 22,997 पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
बाजार में आई इस तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये में मजबूती और सेंसेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के दौरान कारोबारियों की पोजिशन में बदलाव ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। आइए जानते हैं शेयर बाजार में आई तेजी के चार प्रमुख कारण।
1. आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे आईटी सेक्टर की अहम भूमिका रही। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बेहतर तिमाही नतीजों और कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने निवेशकों की धारणा को मजबूती दी।
वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। यदि विदेशी निवेशक अमेरिकी टेक कंपनियों से अपना कुछ निवेश निकालकर भारतीय शेयरों की ओर रुख करते हैं, तो घरेलू बाजार को इसका फायदा मिल सकता है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव की संभावना को बाजार में तेजी का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे, भविष्य की आय और वैश्विक मांग से जुड़े संकेत भी इस सेक्टर की दिशा तय करेंगे।
2. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी से बढ़ा उतार-चढ़ाव
15 अक्टूबर को सेंसेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी भी थी। वायदा एवं विकल्प यानी फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) कारोबार में एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स को अपनी मौजूदा पोजिशन बंद करनी पड़ती है या उन्हें आगे की अवधि के लिए बढ़ाना होता है।
इस प्रक्रिया में बाजार में खरीदारी और बिकवाली का दबाव तेजी से बदल सकता है। यदि बाजार में गिरावट की उम्मीद लगाकर बनाई गई शॉर्ट पोजिशन बंद की जाती हैं, तो शॉर्ट कवरिंग के कारण शेयरों और इंडेक्स में तेज उछाल आ सकता है।
हालांकि, एक्सपायरी के दिन तेजी आने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में लंबी अवधि की तेजी शुरू हो गई है। इसके लिए कारोबार की मात्रा, निवेशकों की भागीदारी और अगले कारोबारी सत्रों में बाजार के प्रदर्शन को देखना जरूरी होगा।
3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए राहत का संकेत हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर देश के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।
दिए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.76 डॉलर यानी करीब 1.75 प्रतिशत गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव 1.02 डॉलर यानी लगभग 1.07 प्रतिशत कम होकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतें कम होने से परिवहन, उत्पादन और अन्य परिचालन लागत में राहत मिलने की संभावना रहती है। इससे महंगाई के दबाव और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, तेल की कीमतों में गिरावट का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितने समय तक बनी रहती है और कंपनियों तथा उपभोक्ताओं तक इसका असर किस हद तक पहुंचता है।
4. रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा बेहतर
डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को रुपया 94.92 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 95.15 रुपये प्रति डॉलर था।
रुपये में मजबूती से आयात पर निर्भर कंपनियों को राहत मिल सकती है। खासकर उन कारोबारों के लिए यह सकारात्मक हो सकता है, जिन्हें कच्चा माल, ऊर्जा या अन्य सामान विदेशों से खरीदना पड़ता है।
हालांकि, रुपये की मजबूती का असर सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं होता। निर्यात करने वाली कंपनियों की आय पर मुद्रा विनिमय दर का अलग प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को रुपये की चाल के साथ कंपनियों के कारोबार और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर रखनी चाहिए।
निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर क्यों अहम?
निफ्टी के 23,000 के करीब पहुंचने के बाद अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को बरकरार रख पाता है या नहीं। तकनीकी विश्लेषण में 22,800 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तकनीकी विश्लेषक जिगर एस. पटेल के अनुसार, निफ्टी के लिए यह स्तर बाजार की आगे की दिशा समझने में मदद कर सकता है। यदि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बना रहता है और खरीदारी जारी रहती है, तो तेजी को आगे समर्थन मिल सकता है।
इसके विपरीत, निफ्टी के लगातार 22,800 से नीचे आने पर मौजूदा तेजी कमजोर पड़ने की आशंका हो सकती है। तकनीकी विश्लेषण में किसी पुराने प्रतिरोध स्तर का बाद में समर्थन बन जाना बाजार की मजबूती का संकेत माना जाता है।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि तकनीकी स्तर बाजार की संभावित दिशा का आकलन करने में मदद करते हैं, लेकिन वे भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते।
क्या शेयर बाजार की तेजी आगे भी जारी रहेगी?
सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेज बढ़त ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। आईटी शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके बावजूद, बाजार की आगे की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कंपनियों के वित्तीय नतीजों, वैश्विक बाजारों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। एक कारोबारी सत्र की तेजी को लंबी अवधि के बुल रन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

