Netanyahu Warning Iran: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की मौजूदा सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के वर्तमान शासन को सत्ता से हटाए बिना इजराइल के सामने मौजूद खतरे को स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि ईरान का शासन पहले की तुलना में कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन यदि वह सत्ता में बना रहता है तो दोबारा अपनी सैन्य ताकत हासिल कर सकता है। इसी के साथ नेतन्याहू ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की उस रिपोर्ट का भी खंडन किया, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर में ईरान पर प्रस्तावित इजराइली हमले को रुकवा दिया था।
Netanyahu Warning Iran: ईरान सरकार को हटाने की बात
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को अपने देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
21 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल के डिमोना में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ईरान के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर कठोर रुख अपनाया।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन मौजूदा शासन भविष्य में फिर से अपनी ताकत बढ़ाने का प्रयास कर सकता है।
उनके मुताबिक, खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ईरान में शासन परिवर्तन आवश्यक है।
इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने सेना, खुफिया एजेंसी मोसाद और अन्य सुरक्षा संस्थानों को इस उद्देश्य से जुड़े निर्देश दिए हैं।
हालांकि, इन निर्देशों को किस तरह लागू किया जाएगा और क्या इसके लिए किसी नए सैन्य अभियान की योजना है, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्होंने नहीं दी।
ईरान को कमजोर बता रहे नेतन्याहू
नेतन्याहू का कहना है कि पिछले सैन्य टकरावों के बाद ईरान की क्षमताओं पर असर पड़ा है।
उन्होंने दावा किया कि इजराइल की कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य तैयारियां और परमाणु कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं।
इजराइली प्रधानमंत्री के अनुसार, ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि भविष्य में वह दोबारा अपने प्रभाव का विस्तार कर सकती है।
इसी वजह से उन्होंने शासन परिवर्तन को इजराइल की सुरक्षा से जुड़ा लक्ष्य बताया।
हालांकि, ईरान की वास्तविक सैन्य क्षमताओं और शासन की स्थिरता को लेकर नेतन्याहू के दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
तेहरान का रुख रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। दूसरी ओर, इजराइल और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा उसकी सैन्य गतिविधियों को लेकर लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने रुकवाया था इजराइल का हमला?
Netanyahu Warning Iran के बीच ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है।
21 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया कि इजराइल ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में ईरान पर नए हमले की तैयारी की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली सेना को 10 अक्टूबर के आसपास ईरान के परमाणु ठिकानों, शासन से जुड़े प्रतिष्ठानों और कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले की तैयारी करने को कहा गया था।
लेकिन तीन जानकार सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना का विरोध किया।
रिपोर्ट में इसकी एक वजह अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले बड़े सैन्य संघर्ष से बचने की इच्छा बताई गई।
हालांकि, यह दावा अज्ञात सूत्रों पर आधारित था और इजराइली सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
नेतन्याहू ने फाइनेंशियल टाइम्स की खबर को बताया गलत
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट सामने आने के बाद नेतन्याहू ने इजराइली चैनल 7 को दिए इंटरव्यू में अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजराइल के प्रस्तावित हमले को रुकवाने के दावे को गलत बताया।
हालांकि, नेतन्याहू ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर हुई बातचीत में वास्तव में क्या चर्चा हुई थी।
उन्होंने ट्रंप के साथ हाल में हुई बातचीत का विस्तृत विवरण देने से भी इनकार कर दिया।
ऐसे में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। एक ओर फाइनेंशियल टाइम्स अज्ञात सूत्रों के आधार पर हमले की योजना और अमेरिकी विरोध का दावा कर रहा है, जबकि नेतन्याहू इस रिपोर्ट को गलत बता रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच वास्तविक बातचीत का स्वतंत्र विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
गाजा में हमास के हथियारों को लेकर भी दिया बयान
ईरान के अलावा नेतन्याहू ने गाजा की सुरक्षा व्यवस्था और हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
चैनल 7 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में गाजा में हमास के हथियारों को हटाने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की संभावित भूमिका पर भी चर्चा हुई है।
नेतन्याहू के मुताबिक, यदि ऐसा अंतरराष्ट्रीय बल उपलब्ध होता है जो हमास को निरस्त्र कर सके, तो इजराइल को उस व्यवस्था पर विचार करने में आपत्ति नहीं होगी।
हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इस उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने वाली किसी अंतरराष्ट्रीय सैन्य व्यवस्था पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
इजराइली प्रधानमंत्री का कहना है कि इसी वजह से हमास को निरस्त्र करने की जिम्मेदारी इजराइल को खुद उठानी पड़ रही है।
गाजा में युद्ध, नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
Netanyahu Warning Iran के बीच परमाणु कार्यक्रम पर विवाद
ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजराइल और तेहरान के बीच तनाव का प्रमुख कारण रहा है।
इजराइल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा और अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरेनियम संवर्धन, परमाणु निरीक्षण और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंता व्यक्त की जाती रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण एक प्रमुख मुद्दा रहा है। लेकिन हाल के महीनों में बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
इस बीच नेतन्याहू के शासन परिवर्तन संबंधी बयान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इजराइल के चुनाव से पहले नेतन्याहू का सख्त रुख
इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव होने हैं। ऐसे समय में नेतन्याहू के ईरान संबंधी बयान को देश की आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
नेतन्याहू अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और ईरान के प्रति सख्त रुख को लगातार सामने रख रहे हैं।
वहीं, इजराइल के विपक्षी नेताओं ने सरकार की सुरक्षा नीतियों और सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा चुनौती मानने के मुद्दे पर इजराइल के विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच काफी हद तक समानता दिखाई देती है। उनके बीच इस चुनौती से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद हैं।
क्या इजराइल और ईरान के बीच फिर बढ़ेगा सैन्य तनाव?
Netanyahu Warning Iran के बाद पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिक गई हैं।
एक तरफ नेतन्याहू ईरान में शासन परिवर्तन को आवश्यक बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नए सैन्य हमले की संभावित योजना को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं।
इससे पहले 14 अक्टूबर को नेतन्याहू ने कहा था कि वह इजराइल के 27 अक्टूबर के चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ पहले से हमला शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने ईरान की ओर से किसी हमले की स्थिति में कड़ा जवाब देने की चेतावनी भी दी थी।
फिलहाल, इजराइल की ओर से ईरान पर किसी नए हमले की निश्चित तारीख या आधिकारिक सैन्य योजना सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब नजर अमेरिका और इजराइल के अगले कदम, ईरान की प्रतिक्रिया तथा परमाणु कार्यक्रम को लेकर संभावित कूटनीतिक बातचीत पर रहेगी।

