Bhagwant Mann Amit Shah के बीच पंजाब की राजनीति को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पंजाब में अगली सरकार किसकी बनेगी, इसका फैसला किसी नेता की इच्छा से नहीं, बल्कि राज्य के 3.25 करोड़ लोगों की मर्जी से होगा। इस दौरान मान ने गुजरात से नशीले पदार्थों की कथित सप्लाई, पंजाब में पुराने नशा नेटवर्क और विधानसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए।
Bhagwant Mann Amit Shah: पंजाब की सरकार पर क्या बोले मान?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में सरकार बनाने का अधिकार जनता के पास है। उन्होंने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य का राजनीतिक भविष्य पंजाब के मतदाता तय करेंगे।
मान ने अपने बयान में पंजाब में नशे की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य में नशे का नेटवर्क मजबूत हुआ था। उन्होंने पुराने मामलों और कथित राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए विपक्ष पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद पंजाब में नशे की समस्या और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
गुजरात से ड्रग्स की सप्लाई पर उठाए सवाल
भगवंत मान ने गुजरात में नशीले पदार्थों की बड़ी बरामदगी का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स बंदरगाहों तक कैसे पहुंच रहे हैं और वहां से दूसरे राज्यों में इनकी सप्लाई कैसे हो रही है।
उन्होंने 20 हजार करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों की जब्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी बरामदगी के बाद सप्लाई नेटवर्क की जांच जरूरी है। मान ने यह भी सवाल उठाया कि यदि समुद्री बंदरगाहों पर सुरक्षा और कस्टम जांच की व्यवस्था है, तो हजारों किलोग्राम नशीले पदार्थ वहां तक कैसे पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री ने गुजरात से पंजाब तक ड्रग्स पहुंचने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर विधानसभा में हंगामा
पंजाब विधानसभा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए।
मान ने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन में चर्चा करने के बजाय विरोध और बहिष्कार का रास्ता अपना रहा है। उनके मुताबिक, विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करने वाले विपक्षी दलों को सदन में चर्चा के दौरान अपनी बात रखनी चाहिए।
इस मुद्दे पर विपक्ष के रुख को लेकर मुख्यमंत्री ने असहमति जताई और कहा कि विधानसभा में उठाए गए सवालों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भगवंत मान ने विपक्ष पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में सवाल पूछना और सरकार से जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन चर्चा में हिस्सा लेना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन की कार्यवाही में सहयोग करने के बजाय विरोध प्रदर्शन पर अधिक ध्यान दे रहा है।
मान के मुताबिक, सरकार विधानसभा में उठने वाले मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से चर्चा में शामिल होने की अपील भी की।
पंजाब की राजनीति में नशा बना बड़ा मुद्दा
पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे की सरकारों और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
भगवंत मान के ताजा बयान में भी नशे की सप्लाई, पुराने राजनीतिक कार्यकाल और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर आरोप लगाए गए। वहीं, अमित शाह के बयान पर उनकी प्रतिक्रिया ने पंजाब में राजनीतिक मुकाबले को फिर चर्चा में ला दिया है।
निष्कर्ष: Bhagwant Mann Amit Shah के बीच बयानबाजी के केंद्र में पंजाब की सरकार, नशे की समस्या और राजनीतिक जवाबदेही के सवाल हैं। भगवंत मान ने कहा कि राज्य में सरकार बनाने का फैसला जनता करेगी। गुजरात से ड्रग्स की सप्लाई और विधानसभा में विपक्ष के रवैये पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

