Nepal Flood Missing: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के दो महीने बाद भी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की एक मां अपनी बेटी की वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है। 40 वर्षीय प्रियंका चौधरी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आकर लापता हो गई थीं। परिवार को अब तक उनकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। मां मधु के पास बेटी की यादों का सहारा है, जबकि भाई तरुण ने प्रियंका का सूटकेस अब तक नहीं खोला है।
परिवार के लिए बीते दो महीने अनिश्चितता और इंतजार में गुजरे हैं। एक तरफ प्रियंका के सुरक्षित मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर उनके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिलने से चिंता लगातार बनी हुई है।
6 सेकंड का वीडियो मां के लिए बना सहारा
प्रियंका की 63 वर्षीय मां मधु अपने मोबाइल में मौजूद छह सेकंड के एक वीडियो को बार-बार देखती हैं। वीडियो में प्रियंका जैकेट और टोपी पहने टट्टू पर बैठी दिखाई देती हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान है और पीछे नीला आसमान नजर आता है।
मधु इस वीडियो को चलाकर बेटी का चेहरा करीब से देखने की कोशिश करती हैं। परिवार के मुताबिक, प्रियंका की यादें उनके लिए बेहद अनमोल हैं। वीडियो में बेटी को खुश देखकर उन्हें कुछ पल के लिए सुकून मिलता है, लेकिन उसके लापता होने का दर्द फिर सामने आ जाता है।
प्रियंका के भाई तरुण भी मां के साथ बैठकर वीडियो देखते हैं। परिवार को अब भी उम्मीद है कि किसी दिन प्रियंका के बारे में कोई सकारात्मक खबर मिलेगी।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई थी विनाशकारी बाढ़
बताई गई जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करके लौट रहा ईशा फाउंडेशन का करीब 80 लोगों का समूह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्यिरोंग इमिग्रेशन कार्यालय के निकट था। इसी दौरान पहाड़ी क्षेत्र से पानी, कीचड़ और चट्टानों का तेज बहाव आया, जिसने आसपास के इलाके को भारी नुकसान पहुंचाया।
प्रियंका वर्ष 2013 से ईशा फाउंडेशन से जुड़ी हुई थीं। यात्रा से लौटते समय हुए इस हादसे के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार के लिए यह समझना मुश्किल है कि उस दिन के बाद प्रियंका के साथ क्या हुआ।
अस्पतालों से मलबे तक बहन की तलाश
प्रियंका के लापता होने की खबर मिलने के बाद उनके भाई तरुण नेपाल पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद उनकी बहन किसी अस्पताल में भर्ती हों और पहचान नहीं हो पाई हो। उन्होंने काठमांडू के अस्पतालों में जानकारी जुटाई, लेकिन उन्हें कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
इसके बाद तरुण हादसे से प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। वहां इमारतों और आसपास के हिस्सों में मलबा जमा था। उन्होंने बताया कि तबाही का दृश्य बेहद भयावह था और इतने बड़े क्षेत्र में किसी एक व्यक्ति को तलाशना आसान नहीं था।
परिवार की कोशिशों के बावजूद प्रियंका का पता नहीं चल सका। अब भी उनके परिजन यह जानना चाहते हैं कि हादसे के दौरान उनके साथ क्या हुआ और क्या उनकी पहचान से जुड़ा कोई साक्ष्य मिल सकता है।
बहन का सूटकेस आज भी अनछुआ
प्रियंका का सूटकेस परिवार के लिए उनकी आखिरी यादों में शामिल है। तरुण इसे काठमांडू के होटल से लेकर बिलासपुर लौटे थे। इसमें परिवार के लिए खरीदे गए उपहार, कपड़े और चॉकलेट रखे हैं।
परिवार ने अब तक सूटकेस को नहीं खोला है। उनके लिए यह केवल सामान नहीं, बल्कि प्रियंका की यात्रा और उनके लौटने की उम्मीद से जुड़ी एक निशानी है।
इस सूटकेस के जरिए परिवार को प्रियंका के साथ बिताए पलों की याद आती है। उनके लौटने की प्रतीक्षा के बीच यह सामान घर में जस का तस रखा हुआ है।
खोज अभियान बंद, डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रियंका के बारे में आधिकारिक जानकारी हासिल करना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, नेपाल में आपदा के बाद चलाया गया खोज एवं बचाव अभियान 45 दिन बाद बंद कर दिया गया था। इसके बाद राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
लापता लोगों की पहचान करने के लिए डीएनए जांच भी की जा रही है। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, प्रियंका के परिवार ने भी डीएनए नमूने जमा कराए हैं। हालांकि, परिवार को अब तक कोई निर्णायक जानकारी नहीं मिली है।
डीएनए मिलान जैसी प्रक्रिया में नमूनों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से तुलना महत्वपूर्ण होती है। प्रियंका के परिजन रिपोर्ट के जरिए उनकी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद कर रहे हैं।
परिवार को अब भी जवाब का इंतजार
Nepal Flood Missing मामले में प्रियंका चौधरी के परिवार की पीड़ा इस बात को सामने लाती है कि किसी प्राकृतिक आपदा के बाद लापता व्यक्ति के परिजनों के लिए अनिश्चितता कितनी कठिन हो सकती है। मां के लिए बेटी का वीडियो और भाई के लिए उसका अनछुआ सूटकेस यादों का सहारा बने हुए हैं।
परिवार को अब भी उम्मीद है कि जांच और डीएनए मिलान से प्रियंका के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी मिलेगी। फिलहाल उनकी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और परिजन जवाब मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

