Shalimar Bagh Mosque Action: दिल्ली के शालीमार बाग में मदीना मस्जिद और आसपास के कुछ ढांचों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कार्रवाई को लेकर BJP और सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर कोई निर्माण अवैध है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाती है और मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।|
कार्रवाई 23 सितंबर को शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल रोड पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत की गई। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मदीना मस्जिद के हिस्सों और सड़क के आसपास स्थित कुछ अन्य ढांचों को हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए की गई।
Shalimar Bagh Mosque Action पर क्या बोले अवधेश प्रसाद?
Shalimar Bagh Mosque Action के बाद फैजाबाद से समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद ने BJP पर तीखा राजनीतिक हमला किया।
अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि BJP धार्मिक और सामुदायिक मुद्दों के जरिए लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति कर रही है। उनका कहना था कि भारत की “विविधता में एकता” की भावना को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी BJP की आलोचना की, हालांकि यह उनका राजनीतिक आकलन है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।
मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं का मुख्य सवाल इसके तरीके, समय और कानूनी प्रक्रिया को लेकर है।
अभिषेक दत्त ने भी सरकार से पूछे सवाल
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भी Shalimar Bagh Mosque Action की आलोचना की।
दत्त ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता दे रही है, जबकि राजधानी में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मामलों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपियों और दूसरे गंभीर मामलों का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या प्रशासन हर मामले में इसी तरह कठोर कार्रवाई करता है। ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक बयान हैं; प्रशासन या अदालत द्वारा इन्हें तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
BJP ने कहा- कार्रवाई को राजनीतिक रंग न दें
इस मामले में BJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कानून के मुताबिक होती है। उन्होंने कहा कि अगर संबंधित कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है तो इसे राजनीतिक उद्देश्य से अलग तरीके से पेश करना उचित नहीं है।
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि संबंधित धार्मिक समिति से आवश्यक प्रक्रिया के तहत संवाद किया गया होगा।
इस तरह विपक्ष जहां कार्रवाई के तरीके और मंशा पर सवाल उठा रहा है, वहीं BJP इसे कानून और अतिक्रमण हटाने से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई बता रही है।
क्यों चला शालीमार बाग में बुलडोजर?
शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल की ओर जाने वाली सड़क को चौड़ा करने की परियोजना पर प्रशासन काम कर रहा है।
इसी रोड पर पहले भी demolition drive चल चुकी है। 23 सितंबर को देर रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नया अभियान शुरू किया गया और मदीना मस्जिद के हिस्से समेत आसपास के कुछ ढांचे हटाए गए।
अधिकारियों का पक्ष है कि ये ढांचे road-widening project में बाधा बन रहे थे और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
हालांकि मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के तरीके तथा नोटिस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
मस्जिद कमेटी ने नोटिस पर उठाए सवाल
मदीना मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि कार्रवाई से पहले उसे कई नोटिस मिले थे, लेकिन कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेज और जवाब अभी विचाराधीन थे।
मस्जिद समिति के अध्यक्ष मोविन खान ने मीडिया को बताया कि MCD की ओर से कई नोटिस जारी किए गए थे और बाद में मामला Appellate Tribunal में पहुंचा।
उनके मुताबिक ट्रिब्यूनल की सुनवाई में एक मंजिल की स्थिति अलग मानी गई, जबकि ऊपरी हिस्सों को नया निर्माण बताया गया और उन्हें हटाने की अनुमति दी गई। मस्जिद समिति ने इस निष्कर्ष से असहमति जताते हुए दावा किया कि ऊपरी हिस्से काफी पुराने हैं।
इसलिए यह कहना कि पूरी मस्जिद को केवल “अवैध” घोषित करके गिराया गया, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ज्यादा व्यापक दावा होगा। कार्रवाई में संरचना के हिस्सों की कानूनी स्थिति को लेकर पक्षों में विवाद बना हुआ है।
आधी रात की कार्रवाई पर भी विवाद
Shalimar Bagh Mosque Action देर रात किए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
AIMIM दिल्ली अध्यक्ष शोएब जमाई समेत विपक्षी नेताओं ने सवाल किया कि अगर demolition का आदेश था तो कार्रवाई दिन में क्यों नहीं की गई।
जमाई ने दावा किया कि मस्जिद के इमाम को अंदर रखे दस्तावेज और धार्मिक सामग्री निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। यह AIMIM का आरोप है।
वहीं प्रशासन ने कार्रवाई को road-widening और encroachment removal drive का हिस्सा बताया है। इलाके में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
आसपास के मकानों पर भी हुई कार्रवाई
इस अभियान में केवल मस्जिद का हिस्सा ही नहीं, बल्कि सड़क के आसपास मौजूद कुछ अन्य residential structures भी demolition के दायरे में आए।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक Max Hospital Road पर mosque और आसपास के houses पर कार्रवाई हुई। इसी सड़क पर इससे पहले भी road-widening project के लिए structures हटाए जा चुके हैं।
इसलिए मौजूदा विवाद का एक पक्ष धार्मिक स्थल की कार्रवाई से जुड़ा है, जबकि प्रशासन इसे बड़े road-widening project का हिस्सा बता रहा है।
Shalimar Bagh Mosque Action की बड़ी बातें
- 23 सितंबर को दिल्ली के शालीमार बाग में demolition drive चली।
- कार्रवाई Max Hospital Road widening project से जुड़ी है।
- मदीना मस्जिद के हिस्से और आसपास के कुछ ढांचे हटाए गए।
- भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई हुई।
- सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने BJP की राजनीति और कार्रवाई पर सवाल उठाए।
- कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भी सरकार की आलोचना की।
- BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कानून के मुताबिक हुई कार्रवाई को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
- मस्जिद कमेटी ने नोटिस और demolition process को लेकर सवाल उठाए।
- Appellate Tribunal में भी निर्माण के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति पर मामला पहुंचा था।
- प्रशासन ने कार्रवाई को road-widening और encroachment removal drive बताया।
- स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
कार्रवाई के बाद तेज हुई राजनीति
कुल मिलाकर Shalimar Bagh Mosque Action अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक विवाद में भी बदल गई है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि demolition का तरीका और धार्मिक स्थल पर कार्रवाई सवाल खड़े करती है। दूसरी ओर BJP नेताओं का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हुई है और इसे सांप्रदायिक या चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
मस्जिद प्रबंधन की ओर से नोटिस और कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के कारण इस विवाद का कानूनी पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आगे संबंधित निकाय, ट्रिब्यूनल या अदालत की कार्यवाही से निर्माण की कानूनी स्थिति और demolition process पर अधिक स्पष्टता आ सकती है।
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