Digital Arrest Scam Supreme Court: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि लगातार जागरूकता अभियान और मीडिया में खबरें आने के बावजूद पढ़े-लिखे लोग ठगों के जाल में कैसे फंस रहे हैं। अदालत को बताया गया कि पिछले सप्ताह एक महिला के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी हुई, जिसमें उसे 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने इस तरह के अपराधों पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत पर चिंता व्यक्त की।
एक महिला ने गंवाए 2.5 करोड़ रुपये
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले अब भी लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद ठगी की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
एमिकस क्यूरी ने अदालत को पिछले सप्ताह सामने आए एक मामले की जानकारी दी, जिसमें एक महिला को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हैरानी जताई और सवाल किया कि जब लोग इस तरह की ठगी के बारे में जानते हैं, तब भी वे अपराधियों के झांसे में कैसे आ जाते हैं।
CJI सूर्यकांत ने लोगों की जागरूकता पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी की खबरें लगातार मीडिया में सामने आ रही हैं। इसके बावजूद लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
अदालत की चिंता इस बात को लेकर है कि जागरूकता के प्रयासों के बाद भी साइबर अपराधी लोगों को डराकर उनसे बड़ी रकम वसूल रहे हैं। पढ़े-लिखे और सामान्य समझ रखने वाले लोग भी ऐसी घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट ठगी में अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। वे किसी आपराधिक मामले में नाम आने, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
राज्यों की पुलिस से मांगी गई रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने बताया कि उन्होंने सभी राज्यों की पुलिस से डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की स्थिति और इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
उन्होंने अदालत को बताया कि कई उपाय किए जाने के बावजूद ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में राज्यों की पुलिस से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर समस्या की गंभीरता और रोकथाम के उपायों को समझने में मदद मिल सकती है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस जे. महादेवन की पीठ कर रही है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट कोई वास्तविक कानूनी गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला ठगी का तरीका है। इसमें अपराधी फोन या वीडियो कॉल के जरिए खुद को किसी सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं और पीड़ित को किसी अपराध में शामिल होने का डर दिखाते हैं।
ठग पीड़ित से कहते हैं कि उसकी गतिविधियों की जांच चल रही है और उसे लगातार वीडियो कॉल पर बने रहना होगा। कई मामलों में वे कानूनी कार्रवाई से बचाने या जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
डिजिटल अरेस्ट ठगी से कैसे बचें?
- किसी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
- गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर पैसे मांगने वालों को रकम ट्रांसफर न करें।
- बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल आने पर अपने परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से सलाह लें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और भारत के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग करें।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब साइबर अपराधी लोगों को डराकर बड़ी रकम वसूलने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। लोगों की सतर्कता, समय पर शिकायत और पुलिस की प्रभावी कार्रवाई इस तरह की ठगी से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है।

