लखनऊ। दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और छात्र-युवाओं को हिरासत में लिए जाने के मामले ने राजनीतिक विवाद बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार से हिरासत में लिए गए सभी छात्र-युवाओं को तत्काल रिहा करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका की आलोचना की। अखिलेश के बयान के मुताबिक, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने छात्रों की रिहाई की मांग की
अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं को जल्द रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जब अपनी सत्ता पर खतरा महसूस होता है, तब वह अन्याय का सहारा लेती है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की भी आलोचना की।
सपा प्रमुख ने पुलिस कार्रवाई की तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के दौर से करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनके ये बयान दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के संदर्भ में आए हैं। हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के बजाय अखिलेश यादव के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
Akhilesh Yadav: बेटियों के साथ दुर्व्यवहार का भी लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़े होने की बात कही जा रही है।
उन्होंने इस कथित घटना को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
Akhilesh Yadav: चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आयोग की भूमिका पर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, तो भाजपा को अपना कार्यालय चुनाव आयोग के दफ्तर में ही खोल लेना चाहिए।
ये आरोप अखिलेश यादव की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच चल रहे विवाद में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं।
Akhilesh Yadav: फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि इस फॉर्म के जरिए कुछ मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश की गई।
अखिलेश के अनुसार, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करना सुनिश्चित करना है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में गलत तरीके से फॉर्म भरवाकर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश हुई है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित शिकायतों, दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।
Akhilesh Yadav: 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी किया दावा
अखिलेश यादव ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में जनता भाजपा को रोकने का काम करेगी। यह उनका राजनीतिक दावा है, चुनाव के नतीजों के बारे में कोई स्थापित तथ्य नहीं।
फिलहाल, अखिलेश यादव ने दिल्ली में हिरासत में लिए गए छात्र-युवाओं की रिहाई की मांग दोहराते हुए सरकार से कार्रवाई करने की अपील की है। दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद जारी है। आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई, संबंधित शिकायतों और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

