CM Yogi Statement में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने EVM और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आलोचना की है। रविवार, 27 सितंबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योगी ने कहा कि जिन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से कांग्रेस ने केंद्र और अलग-अलग राज्यों में चुनाव जीते हैं, उन्हीं मशीनों को चुनावी नतीजे प्रतिकूल आने पर “ब्लैक बॉक्स” बताना उचित नहीं है। यह मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।
योगी ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका, CAG और सेना जैसी संस्थाओं को लेकर विपक्ष के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक हितों के मुताबिक संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसके उलट चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लोकतांत्रिक आवश्यकता बताते रहे हैं।
CM Yogi Statement: EVM पर क्या बोले?
CM Yogi Adityanath Statement में EVM विवाद प्रमुख मुद्दा रहा। योगी ने राहुल गांधी की उस टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें EVM को “ब्लैक बॉक्स” बताया गया था।
यह टिप्पणी राहुल गांधी ने जून 2024 में की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि भारतीय EVM की पर्याप्त सार्वजनिक जांच नहीं होती और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने चुनाव आयोग से EVM व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी की थी।
योगी ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इसी चुनावी व्यवस्था और EVM के जरिए पहले केंद्र और विभिन्न राज्यों में सरकारें बनाई हैं। उनके मुताबिक चुनाव परिणाम अपने पक्ष में आने पर EVM को स्वीकार करना और हार के बाद उस पर सवाल उठाना विरोधाभासी है।
यह BJP और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक तर्क है। EVM की विश्वसनीयता को लेकर अलग-अलग विपक्षी दल समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं।
CM Yogi Statement: SIR विवाद पर भी कांग्रेस को जवाब
CM Yogi Adityanath Statement में मतदाता सूची के Special Intensive Revision पर चल रहे विवाद का भी जिक्र किया गया।
योगी ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और भारत में पहले भी अलग-अलग वर्षों में intensive revision किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट की है और छूटे पात्र मतदाताओं को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जा रहा है।
विपक्षी दलों की मुख्य चिंता यह है कि बड़े पैमाने पर voter list revision के दौरान कोई पात्र नागरिक गलती से सूची से बाहर न हो जाए। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है और पात्र मतदाताओं के लिए claims, objections और verification की प्रक्रिया उपलब्ध है।
CM Yogi Statement: चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट क्या है?
SIR विवाद के बीच 23 सितंबर को The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े किए।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ प्रक्रियाओं और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव और electoral-roll database के नियंत्रण जैसे विषय शामिल थे।
CM Yogi Statement, इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए और जवाबदेही की मांग की।
हालांकि चुनाव आयोग ने यह स्वीकार करते हुए कि प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग विचार या observations सामने आए थे, कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग के मुताबिक आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से असहमति के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
राहुल गांधी और विपक्ष ने क्या आरोप लगाए?
SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बाद राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का तर्क है कि electoral roll से नाम हटाने जैसी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए और हर पात्र मतदाता के मतदान अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके प्रमुख अंतिम फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है। आयोग ने आंतरिक मतभेद संबंधी रिपोर्ट को निर्णय प्रक्रिया के दौरान होने वाली सामान्य चर्चा का हिस्सा बताया।
इसलिए आयोग के भीतर “आपत्तियां दर्ज होना” और अंतिम फैसलों पर औपचारिक असहमति होना दो अलग बातें हैं—मौजूदा विवाद इन्हीं दोनों व्याख्याओं के बीच केंद्रित है।
न्यायपालिका और दूसरी संस्थाओं का भी किया जिक्र
CM Yogi Statement केवल EVM और SIR तक सीमित नहीं रहा। योगी ने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रुख का उल्लेख करते हुए CAG, न्यायपालिका और सेना से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अलग-अलग मौकों पर संवैधानिक और राष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है। इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने Rafale से जुड़े CAG विवाद, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित राजनीतिक बहस का जिक्र किया।
ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं। विपक्ष का पक्ष रहा है कि सरकारी फैसलों या संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक निगरानी का हिस्सा है।
CM Yogi Statement: EVM और SIR पर जारी है राजनीतिक बहस
CM Yogi Statement ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित आपत्तियों को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस जारी है।
योगी आदित्यनाथ और BJP चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल मतदाता सूची में बदलाव, EVM और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। साथ ही आयोग ने कहा है कि किसी संस्थागत प्रक्रिया में अलग-अलग अधिकारियों की शुरुआती राय या सुझाव अंतिम निर्णय से असहमति के बराबर नहीं होते।
ऐसे में EVM और SIR को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव आयोग के आधिकारिक आदेश, अदालत के फैसले और अंतिम मतदाता सूचियां ही संबंधित प्रक्रियाओं की स्थिति स्पष्ट करने वाले प्रमुख दस्तावेज रहेंगे।
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