Dara Singh Chauhan: उत्तर प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। बलिया में मीडिया से बातचीत के दौरान चौहान ने इस मुद्दे को देश के सामने मौजूद दूसरे विषयों की तुलना में “सेकेंडरी” बताया। उन्होंने कहा कि सामने आए दावों और आपत्तियों के तथ्यों को देखना जरूरी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
दारा सिंह चौहान वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कारागार मंत्री हैं। राज्य के कारागार प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें इस पद पर सूचीबद्ध करती है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद हाल में तब और बढ़ा, जब एक मीडिया जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
Dara Singh Chauhan ने क्या कहा?
Dara Singh Chauhan ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मौजूदा विवाद को तत्काल अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनका कहना था कि पहले यह समझना जरूरी है कि सामने आई आपत्तियों और आरोपों के पीछे तथ्य क्या हैं। चौहान ने इसे देश के लिए “प्राइमरी” के बजाय “सेकेंडरी” मुद्दा बताते हुए कहा कि जांच या तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई तथ्य सही पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की बात देखी जा सकती है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी औपचारिक जांच के शुरू होने की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए “जांच चल रही है” को सरकारी रूप से स्थापित तथ्य के बजाय चौहान के बयान के संदर्भ में ही पढ़ा जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर ताजा राजनीतिक विवाद The Indian Express की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के विभिन्न फैसलों और आदेशों पर करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। इनमें कुछ फैसले कथित तौर पर उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन विषयों का जिक्र है:
- नए मतदाताओं के लिए Form-6 में बदलाव
- मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया
- electoral-roll database के केंद्रीकरण को लेकर चिंता
- ERO स्तर पर software access और authority
- पश्चिम बंगाल और गोवा में मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसले
- आयोग के अंदर फैसले लेने की प्रक्रिया
The Indian Express के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर लिखित रूप से गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
इस मामले में Election Commission की ओर से अलग पक्ष सामने रखा गया है।
आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव होना सामान्य प्रक्रिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक आंतरिक deliberations में अलग दृष्टिकोण सामने आ सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
आयोग से जुड़े अधिकारियों ने उन दावों को खारिज किया कि SIR और दूसरी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के अंतिम फैसले एकतरफा लिए गए थे।
इसलिए फिलहाल दो अलग पहलू सामने हैं—मीडिया रिपोर्ट में लिखित आपत्तियों का विवरण है, जबकि Election Commission का कहना है कि अंतिम फैसलों में सभी तीन सदस्यों की सहमति थी।
Dara Singh Chauhan बोले- पहले तथ्यों को देखा जाए
Dara Singh Chauhan ने इसी विवाद के बीच किसी तत्काल निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय तथ्यों की जांच पर जोर दिया।
उनका कहना था कि यह भी देखा जाना चाहिए कि आपत्तियां किन परिस्थितियों में दर्ज हुईं और उनके पीछे वास्तविक तथ्य क्या थे।
चौहान ने संकेत दिया कि अगर किसी मामले में तथ्यात्मक गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी कार्रवाई जैसी नहीं होती। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी विशेष संसदीय प्रक्रिया लागू होती है। इसी मुद्दे पर विपक्ष पहले भी संसद में नोटिस दे चुका है।
SIR भी विवाद के केंद्र में
ज्ञानेश कुमार से जुड़ा यह विवाद Special Intensive Revision यानी SIR की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
SIR के तहत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने मतदाताओं के नाम हटाने और verification system पर सवाल उठाए हैं।
वहीं Election Commission का कहना है कि प्रक्रिया मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने के लिए कानूनी तथा प्रशासनिक नियमों के तहत की जा रही है।
The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि संधू और जोशी की कुछ आपत्तियां SIR से जुड़े Form-6, voter additions-deletions और electoral database के control से संबंधित थीं।
विपक्ष ने भी तेज किए हमले
रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे या पद से हटाने की मांग भी उठाई है। इन मांगों को राजनीतिक पक्षों के आरोप और मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए; आरोपों पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।
दूसरी तरफ Election Commission ने कहा है कि internal checks and balances को किसी संस्थागत टूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और आयोग के अंतिम फैसले सामूहिक रहे हैं।
Dara Singh Chauhan के बयान की बड़ी बातें
- दारा सिंह चौहान ने ज्ञानेश कुमार विवाद को “सेकेंडरी” मुद्दा बताया।
- उन्होंने किसी अंतिम निष्कर्ष से पहले तथ्यों को देखने की बात कही।
- कार्रवाई की बात को उन्होंने तथ्यों की पुष्टि से जोड़ा।
- The Indian Express ने दो चुनाव आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट प्रकाशित की।
- आपत्तियां Form-6, मतदाता सूची, IT systems और SIR से जुड़े कुछ कदमों पर थीं।
- Election Commission का कहना है कि अलग राय internal deliberation का हिस्सा है।
- आयोग के अनुसार अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
- विपक्ष ने इस रिपोर्ट के बाद CEC पर राजनीतिक हमला तेज किया है।
- आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब, दोनों पर राजनीतिक बहस जारी है।
अब आधिकारिक तथ्यों पर नजर
कुल मिलाकर Dara Singh Chauhan का बयान ऐसे समय आया है जब Election Commission की आंतरिक decision-making और SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है।
एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का विस्तृत विवरण सामने आया है, वहीं आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय सामूहिक और सर्वसम्मत रहे।
ऐसे में किसी भी पक्ष के राजनीतिक आरोपों को स्थापित तथ्य मानने के बजाय आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड, न्यायिक कार्यवाही और आगे सामने आने वाले दस्तावेजों के आधार पर स्थिति का आकलन करना जरूरी होगा।
आधिकारिक जानकारी के लिए Election Commission of India और उत्तर प्रदेश कारागार विभाग के लिए UP Prisons Administration देखा जा सकता है।

