Diwali train waiting list: दीपावली के त्योहार पर घर जाने और छुट्टियां बिताने के बाद वापस लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रेलवे की प्रमुख ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है। अलवर से गुजरने वाली कई ट्रेनों में नवंबर के मध्य तक लंबी वेटिंग चल रही है, जबकि कुछ ट्रेनों के स्लीपर कोच में नो रूम की स्थिति बन गई है। दूसरी ओर दिल्ली-जयपुर रूट पर बसों में भी सीटों के लिए मारामारी शुरू हो गई है। निजी बसों और ट्रैवल एजेंसियों की एडवांस बुकिंग बढ़ने से यात्रियों को मनचाहे समय पर सीट नहीं मिल पा रही है। त्योहारी सीजन में बढ़े यात्रीभार ने रेल और सड़क दोनों मार्गों पर सफर की परेशानी बढ़ा दी है।
दिवाली ट्रेन वेटिंग से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
त्योहारी सीजन में रेलवे की प्रमुख ट्रेनों में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अलवर से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों में नवंबर के मध्य तक लंबी वेटिंग देखने को मिल रही है। कुछ ट्रेनों में स्लीपर क्लास की सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं।
12414 गलता धाम पूजा सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 17 नवंबर तक औसत वेटिंग करीब 40 चल रही है। वहीं, 15014 रानीखेत एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में अधिकांश दिनों में नो रूम की स्थिति बनी हुई है।
इसी तरह 12916 आश्रम एक्सप्रेस में 21 नवंबर तक औसत वेटिंग 66 तक पहुंच गई है। 15 नवंबर को इस ट्रेन में वेटिंग 128 के पार बताई जा रही है।
इन ट्रेनों में नो रूम और लंबी वेटिंग
त्योहारी सीजन में अलवर से गुजरने वाली दूसरी प्रमुख ट्रेनों में भी सीटों की उपलब्धता कम हो गई है।
- 14662 शालीमार मालानी एक्सप्रेस: 17 नवंबर तक औसत वेटिंग करीब 40।
- 15716 किशनगंज गरीब नवाज एक्सप्रेस: 19 नवंबर तक नो रूम।
- 12413 गलता धाम पूजा सुपरफास्ट एक्सप्रेस: पूरे नवंबर में स्लीपर क्लास की औसत वेटिंग करीब 76, जबकि कई तारीखों में वेटिंग 100 से 143 के पार।
- 19403 भुज-दिल्ली एक्सप्रेस: 16 नवंबर तक नो रूम की स्थिति।
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दीपावली के आसपास रेल यात्रियों को कन्फर्म टिकट के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है। परिवार के साथ यात्रा करने वालों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
दिल्ली-जयपुर रूट पर बसों में भी सीटों की मारामारी
ट्रेनों में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में यात्री अब बसों का विकल्प तलाश रहे हैं। इसका सीधा असर दिल्ली-जयपुर रूट पर बसों की बुकिंग में दिखाई दे रहा है।
दिवाली से दो दिन पहले ही इस रूट पर यात्रियों की मांग बढ़ गई है। स्लीपर बसों में भी एडवांस बुकिंग होने लगी है। ऐसे में यात्रियों को अपनी पसंद के समय पर सीट मिलना मुश्किल हो रहा है।
खासतौर पर दिल्ली से जयपुर और जयपुर से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को यात्रा की योजना पहले से बनानी पड़ रही है।
ट्रैवल एजेंसियों ने बढ़ाए किराए
त्योहारी सीजन में निजी ट्रैवल एजेंसियों के वाहनों की मांग बढ़ने के साथ ही किराए में भी इजाफा हुआ है। यात्रियों का कहना है कि अधिक पैसे खर्च करने के बावजूद मनचाहे समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
इसका असर उन परिवारों पर ज्यादा पड़ रहा है, जो दीपावली मनाने के लिए दूसरे शहरों से अपने घर जाना चाहते हैं। ट्रेन में टिकट नहीं मिलने पर बस का विकल्प चुनना भी अब आसान नहीं रह गया है।
दिवाली के बाद वापसी में भी बढ़ सकती है परेशानी
दीपावली के बाद नौकरी और कारोबार के सिलसिले में वापस लौटने वाले लोगों के सामने भी यही चुनौती रहने वाली है। नवंबर के मध्य तक कई ट्रेनों में पहले से लंबी वेटिंग और नो रूम की स्थिति बनी हुई है।
ऐसे में यात्रियों को ट्रेन और बस दोनों की उपलब्धता देखकर अपनी यात्रा की योजना बनानी पड़ रही है। त्योहारी सीजन में बढ़े यात्रीभार ने साफ कर दिया है कि दिवाली के दौरान दिल्ली-जयपुर रूट और अलवर से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में सफर करना आसान नहीं रहने वाला है।

