Premanand Maharaj: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज और उनसे जुड़े आश्रम को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कई संत और कथावाचक उनके समर्थन में सामने आए हैं। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास और देवी चित्रलेखा ने बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या सोशल मीडिया और मीडिया में आरोप तय कर देने पर सवाल उठाए हैं।
यह विवाद प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की 25 सितंबर को हुई मौत के बाद बढ़ा है। पुलिस घटना से जुड़े CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। अभी तक जांच का कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
Premanand Maharaj के समर्थन में क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए संतों और सनातन पर लगातार सवाल उठाए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना में पूरी सच्चाई सामने आने से पहले संतों या धार्मिक स्थलों को दोषी ठहराने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने महिलाओं और श्रद्धालुओं से धार्मिक स्थलों पर जाते समय सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने और अनजान लोगों पर तुरंत भरोसा न करने की अपील की।
उनका बयान इस मामले की जांच का निष्कर्ष नहीं, बल्कि मौजूदा विवाद पर उनकी प्रतिक्रिया है।
Premanand Maharaj: अनिरुद्धाचार्य ने ‘मीडिया ट्रायल’ पर उठाए सवाल
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि किसी मामले की पूरी जानकारी सामने आए बिना मीडिया या सोशल मीडिया को खुद फैसला सुनाने की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्लेटफॉर्म TRP और views के लिए प्रेमानंद महाराज को लेकर एकतरफा निष्कर्ष पेश कर रहे हैं।
अनिरुद्धाचार्य ने प्रेमानंद महाराज के धार्मिक और सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवा उनके प्रवचनों के जरिए भक्ति से जुड़े हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या धार्मिक योगदान अपने-आप किसी जांच के सवालों का जवाब नहीं होता। रसिक दुलारी मामले में तथ्य पुलिस जांच से ही निर्धारित होंगे।
Premanand Maharaj: राजेंद्र दास ने बताया ‘युगों में होने वाला महापुरुष’
मलूक पीठ के पीठाधीश्वर राजेंद्र दास ने भी प्रेमानंद महाराज के समर्थन में अपनी बात रखी है।
उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज ने बड़ी संख्या में युवाओं को धर्म, माता-पिता की सेवा और राधा नाम से जोड़ने का काम किया है। उनके मुताबिक प्रेमानंद महाराज जैसे संत लंबे समय बाद समाज में आते हैं और बिना प्रमाण उनके खिलाफ बयानबाजी उचित नहीं है।
राजेंद्र दास ने संत समाज से भी अपील की कि तथ्यों के बिना किसी संत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले दावों के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
देवी चित्रलेखा बोलीं- अधूरा ज्ञान खतरनाक
प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा ने भी मौजूदा विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि किसी घटना की पूरी जानकारी न होने के बावजूद सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े निष्कर्ष देना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक “अधूरा ज्ञान” किसी भी संवेदनशील मामले में गलत धारणाएं पैदा कर सकता है।
उन्होंने लोगों से मर्यादा बनाए रखने और जांच पूरी होने तक अपुष्ट दावों से बचने की अपील की।

Rasik Dulari Case में क्या जांच चल रही है?
25 वर्षीय दीपक लोधी, जिन्हें आश्रम में रसिक दुलारी शरण के नाम से जाना जाता था, की 25 सितंबर को वृंदावन में मौत हुई थी।
घटना के बाद सामने आए CCTV footage के आधार पर पुलिस मौत से पहले की गतिविधियों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने आश्रम में रहने वाले लोगों से पूछताछ की है और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच एक संभावित आत्महत्या की दिशा में भी गई है, लेकिन घटना से पहले क्या हुआ, इसके पीछे क्या कारण थे और क्या कोई अन्य व्यक्ति या परिस्थिति इससे जुड़ी थी—इन सवालों पर जांच जारी है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी आरोप या साजिश के दावे को फिलहाल स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
Premanand Maharaj: आश्रम ने भी जारी किया बयान
श्री राधा केली कुंज ट्रस्ट ने घटना के बाद आधिकारिक बयान जारी कर रसिक दुलारी शरण की मौत पर दुख जताया।
ट्रस्ट ने कहा कि प्रेमानंद महाराज और पूरा परिकर घटना से आहत है और जांच में पुलिस-प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं और आम लोगों से जांच पूरी होने तक अफवाहों और अपुष्ट जानकारियों को न फैलाने की अपील की गई।
Premanand Maharaj की सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग
विवाद के बीच प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी सामने आई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले से जुड़े दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने आश्रम और उसके आसपास की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग रखी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुरक्षा को लेकर पत्र में जताई गई आशंकाएं पत्र लेखक के दावे हैं। किसी विशिष्ट खतरे की आधिकारिक सुरक्षा एजेंसी द्वारा पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
जांच और समर्थन—दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी
Premanand Maharaj के समर्थन में कई धार्मिक हस्तियों के आने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। संतों का कहना है कि जांच से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना गलत है, जबकि दूसरी ओर रसिक दुलारी शरण की मौत से जुड़े सवालों की जांच जारी है।
दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है।
किसी संत के प्रति समर्थन या सम्मान जांच का विकल्प नहीं है, उसी तरह जांच जारी होने मात्र से प्रेमानंद महाराज या आश्रम की दोषी भूमिका भी साबित नहीं होती।
फिलहाल पुलिस CCTV, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की परिस्थितियां स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही साफ होगी।

