UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि उनकी कोशिश है कि इसी अक्टूबर में सीटों के बंटवारे का मामला पूरी तरह तय हो जाए, ताकि गठबंधन के उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
गौतम ने कांग्रेस के लिए गठबंधन में “बराबर सम्मान और बराबर हिस्सेदारी” की बात कही है। हालांकि 8 अक्टूबर तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों का अंतिम फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है और दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
UP Politics: अक्टूबर में सीट शेयरिंग पर फैसला?
राजेंद्र पाल गौतम का कहना है कि सीटों के बंटवारे को लंबे समय तक लंबित रखने से उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सीटों की पहचान जल्दी हो जाने पर संभावित उम्मीदवारों को अपने विधानसभा क्षेत्र में संगठन मजबूत करने और मतदाताओं के बीच काम करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
गौतम पहले भी कह चुके हैं कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारी कर रही है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन होने की स्थिति में वास्तविक संख्या दोनों दलों की बातचीत के बाद ही तय होगी।
UP Politics: कांग्रेस कितनी सीटें चाहती है?
यही सवाल पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है।
पहले मीडिया रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से कम से कम 150 सीटों की मांग की बात सामने आई थी। बाद में राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि उन्होंने 150 नहीं बल्कि करीब 200 सीटों की बात की थी और कांग्रेस गठबंधन में बराबर हिस्सेदारी चाहती है।
हालांकि बाद के बयान में गौतम ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम सीट संख्या पार्टी की senior leadership तय करेगी। इसलिए 150 या 200 में से किसी संख्या को अभी अंतिम कांग्रेस मांग या तय समझौते के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
UP Politics: अखिलेश यादव ने क्या कहा?
सीट शेयरिंग को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को इस मुद्दे पर संयम रखने का संदेश दिया है।
अखिलेश का कहना है कि गठबंधन में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल रही हैं, बल्कि लक्ष्य चुनाव जीतना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीटों से ज्यादा महत्वपूर्ण गठबंधन की जीत और साझा राजनीतिक उद्देश्य हैं।
इससे साफ है कि दोनों दल फिलहाल गठबंधन तोड़ने की बात नहीं कर रहे, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर bargaining जारी है।
UP Politics: 2024 में साथ चुनाव लड़ चुके हैं कांग्रेस-सपा
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में INDIA bloc के तहत साथ चुनाव लड़ा था।
उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राज्य की 37 लोकसभा सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत मिली थी। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल उसी गठबंधन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा में सीटों की संख्या और स्थानीय समीकरण लोकसभा चुनाव से अलग हैं।
इसी वजह से 403 विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में लंबी बातचीत होने की संभावना है।
UP Politics: राहुल गांधी की राजनीति से जुड़ने का दावा
राजेंद्र पाल गौतम ने कांग्रेस के संगठन विस्तार का भी जिक्र किया है।
उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित होकर अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूह पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं।
हाल के दिनों में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी समेत कुछ छोटे राजनीतिक समूहों और नेताओं की कांग्रेस नेतृत्व के साथ मुलाकातें भी हुई हैं। कांग्रेस इन संपर्कों को 2027 से पहले अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को विस्तार देने की कोशिश के तौर पर देख रही है।
हालांकि इन छोटे दलों को गठबंधन में कितनी सीटें मिलेंगी या वे कांग्रेस के हिस्से की सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, इस पर अभी कोई अंतिम व्यवस्था सार्वजनिक नहीं हुई है।
UP Politics: ‘वोट चोरी’ आंदोलन का भी किया जिक्र
UP Politics पर बात करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कांग्रेस के चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ जारी आंदोलन का भी जिक्र किया।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी सूची में कथित अनियमितताओं को “वोट चोरी” कहकर राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता 6 और 7 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए और पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में भी लिया।
ये विपक्ष के आरोप हैं। BJP और चुनाव आयोग ने चुनाव में हेरफेर या पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
UP PoliticsP: दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या है विवाद?
इस विवाद की पृष्ठभूमि में The Indian Express की जांच रिपोर्ट भी है।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में voter addition, deletion, Form-6 और SIR प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को सामान्य institutional decision-making process का हिस्सा बताया है।
ECI का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के विचार या सुझाव सामने आ सकते हैं, लेकिन पिछले एक साल के सभी final decisions unanimous रहे हैं।
इसलिए दो आयुक्तों द्वारा सवाल उठाए जाने को सीधे यह प्रमाण नहीं माना जा सकता कि किसी चुनाव में “वोट चोरी” साबित हो गई है।
UP Politics: तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल
RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी इसी विवाद को लेकर चुनाव आयोग पर हमला किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार से शुरू हुआ कथित चुनावी हेरफेर का तरीका बाद में दूसरे राज्यों तक पहुंचा और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि ये तेजस्वी यादव और विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR और electoral-roll प्रक्रिया से जुड़े अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सहमति से हुए हैं।
UP Politics: अब सीट शेयरिंग पर नजर
फिलहाल UP Politics में सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे का है।
राजेंद्र पाल गौतम अक्टूबर में समझौता पूरा करने की बात कर रहे हैं, कांग्रेस बराबर सम्मान और बड़ी हिस्सेदारी मांग रही है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने मौजूदा संगठनात्मक और चुनावी आधार को ध्यान में रखकर बातचीत करना चाहती है।
ऐसे में “इसी महीने सब कुछ फाइनल हो जाएगा” को अभी तय तथ्य की जगह कांग्रेस प्रभारी द्वारा रखी गई timeline या लक्ष्य के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।
अंतिम तस्वीर तभी स्पष्ट होगी जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व औपचारिक सीट-शेयरिंग फॉर्मूला सार्वजनिक करेगा।

