UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित हो गए हैं। प्रदेश की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार बिना मतदान के निर्वाचित हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ और समाजवादी पार्टी (सपा) के दो प्रत्याशियों ने राज्यसभा में जगह बनाई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता समाप्त हो गई है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही गतिविधियों पर विराम लग गया है। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित मुकाबले की अटकलों के बीच सभी सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भाजपा ने आठ और सपा ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। नामांकन की जांच में दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद केवल 10 वैध उम्मीदवार बचे थे।
शुक्रवार को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने तक किसी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों के निर्वाचित होने की घोषणा कर दी।
UP Rajya Sabha Election: बिना मतदान कैसे तय हुए परिणाम?
राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति तब बनती है, जब नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध सीटों के बराबर ही वैध उम्मीदवार मैदान में रह जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में भी इस बार ऐसा ही हुआ। दस सीटों के लिए दस उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए।
निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के अनुसार, दो निर्दलीय उम्मीदवारों कांते स्याना और ओंकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र निर्धारित औपचारिकताएं पूरी नहीं करने के कारण खारिज कर दिए गए थे।
इसके बाद भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी ही मैदान में बचे।
चूंकि उम्मीदवारों की संख्या और रिक्त सीटों की संख्या समान थी, इसलिए मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
UP Rajya Sabha Election: भाजपा के ये आठ नेता पहुंचे राज्यसभा
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आठ उम्मीदवार उतारे थे। सभी प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है।
निर्वाचित भाजपा सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:
- विद्यासागर सोनकर
- प्रियंका सिंह रावत
- गोपी कृष्ण पांडेय
- धर्मपाल सिंह
- राधाकांत ओझा
- प्रकाश पाल
- रामप्रताप सिंह चौहान
- श्रुति गंगवार
भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
आठ उम्मीदवारों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। पार्टी ने इस बार निवर्तमान सांसदों को दोबारा उम्मीदवार बनाने के बजाय नए चेहरों पर भरोसा जताया।
निर्विरोध निर्वाचन के बाद ये नेता राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से भाजपा का प्रतिनिधित्व करेंगे।
UP Rajya Sabha Election: समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार भी निर्वाचित
UP Rajya Sabha Election में समाजवादी पार्टी के दोनों प्रत्याशियों को भी निर्विरोध सफलता मिली है।
सपा की ओर से वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं।
रामगोपाल यादव समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
वहीं, धनराज परिमल नाथवानी कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनका संबंध रिलायंस इंडस्ट्रीज से है।
निर्वाचित होने के बाद धनराज नाथवानी ने सोशल मीडिया पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राज्यसभा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
अखिलेश यादव ने क्यों नहीं उतारा तीसरा उम्मीदवार?
राज्यसभा चुनाव से पहले चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है।
हालांकि, नामांकन की अंतिम तारीख से पहले सपा नेतृत्व ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया।
पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि उनका ध्यान राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला करने के बजाय वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर है।
उन्होंने विधानसभा की 403 सीटों का जिक्र करते हुए पार्टी की आगे की राजनीतिक प्राथमिकता स्पष्ट की थी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में अतिरिक्त विधायकों के समर्थन और क्रॉस वोटिंग जैसे सवाल सामने आ सकते थे।
सपा के इस फैसले के बाद राज्यसभा की सभी दस सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।
UP Rajya Sabha Election: भाजपा ने इस बार पुराने सांसदों को नहीं दिया मौका
भाजपा की उम्मीदवार सूची में इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला।
पार्टी ने अपने किसी भी निवर्तमान राज्यसभा सदस्य को फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को भी इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का टिकट नहीं मिला।
इसके अलावा अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृजलाल और गीता शाक्य जैसे नेताओं के स्थान पर नए उम्मीदवार उतारे गए।
डॉ. दिनेश शर्मा सितंबर में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके थे।
भाजपा के इस फैसले को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व में बदलाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
UP Rajya Sabha Election: विधानसभा के संख्या बल ने तय किए समीकरण
UP Rajya Sabha Election में उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राज्यसभा सदस्यों का चुनाव आम मतदाता सीधे नहीं करते। विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए मतदान करते हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास पर्याप्त विधायक संख्या होने के कारण आठ उम्मीदवारों के निर्वाचन की स्थिति बनी।
वहीं, समाजवादी पार्टी के पास दो प्रत्याशियों के निर्वाचन के लिए आवश्यक समर्थन उपलब्ध था।
सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के निर्णय के बाद मतदान के जरिए मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई।
इस तरह दोनों प्रमुख दलों को उनके उम्मीदवारों की संख्या के अनुसार सीटें मिल गईं।
UP Rajya Sabha Election: बसपा का प्रतिनिधित्व हुआ समाप्त
राज्यसभा चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से भी जुड़ा है।
उत्तर प्रदेश की जिन दस सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें पहले भाजपा के आठ, सपा के एक और बसपा के एक सांसद का प्रतिनिधित्व था।
नई व्यवस्था में भाजपा के आठ और सपा के दो सांसद निर्वाचित हुए हैं।
इसके साथ ही राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है।
समाजवादी पार्टी को पहले की तुलना में एक अतिरिक्त सीट मिली है, जबकि भाजपा ने आठ सीटों पर अपना प्रतिनिधित्व बरकरार रखा है।
नवनिर्वाचित सांसदों को दिए गए प्रमाण पत्र
निर्वाचन अधिकारी की ओर से परिणाम घोषित किए जाने के बाद नवनिर्वाचित उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे गए।
यह प्रमाण पत्र संबंधित उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक पुष्टि करता है।
राज्यसभा के लिए निर्वाचित सदस्यों का सामान्य कार्यकाल छह वर्ष होता है।
उत्तर प्रदेश की जिन दस सीटों पर यह चुनाव हुआ है, उनके मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना है।
इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नए निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल शुरू होगा।
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जहां सदस्य कानून निर्माण, राष्ट्रीय नीतियों और राज्यों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लेते हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम राजनीतिक घटनाक्रम
UP Rajya Sabha Election के नतीजे ऐसे समय सामने आए हैं, जब उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं।
भाजपा ने जहां राज्यसभा के लिए नए उम्मीदवारों को अवसर दिया है, वहीं समाजवादी पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों का निर्वाचन सुनिश्चित किया है।
दोनों दल आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
राज्यसभा की सभी दस सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन के साथ चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
अब नवनिर्वाचित सांसदों की संसदीय भूमिका और उत्तर प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता पर नजर रहेगी।

