Yogi Cabinet Meeting Timing: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री बदलने के साथ सरकार चलाने का तरीका भी बदलता रहा है। मायावती और मुलायम सिंह यादव के शासनकाल की कैबिनेट बैठकों को लेकर एक दिलचस्प दावा सामने आता है। पूर्व मंत्री एसपी सिंह बघेल के मुताबिक, मायावती सरकार में कैबिनेट बैठकें महज साढ़े तीन से सात मिनट तक चलती थीं, जबकि मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में लगभग 15 मिनट में समाप्त हो जाती थीं। इसके विपरीत, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के शुरुआती दिनों में मंत्रियों और अधिकारियों की विभागीय समीक्षा बैठकें शाम छह बजे शुरू होकर कई बार आधी रात तक चलती थीं।
यह विवरण लेखक शांतनु गुप्ता की वर्ष 2017 में प्रकाशित पुस्तक The Monk Who Became Chief Minister और बघेल के सार्वजनिक बयान से जुड़ा है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि मायावती और मुलायम सिंह के संबंध में कैबिनेट बैठकों की अवधि बताई गई है, जबकि योगी सरकार के संदर्भ में छह घंटे का उदाहरण मुख्य रूप से विभागीय प्रस्तुतियों का है। इसे योगी कैबिनेट की हर बैठक की निश्चित अवधि नहीं माना जा सकता।
Yogi Cabinet Meeting Timing: मायावती से योगी तक का दावा
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एसपी सिंह बघेल अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके हैं। वे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की राजनीति से जुड़े रहे हैं और बाद में भाजपा सरकार में भी मंत्री बने।
Yogi Cabinet Meeting, शासन की कार्यशैली से जुड़े एक सवाल पर बघेल ने अपने अनुभवों के आधार पर तीन मुख्यमंत्रियों की बैठकों की तुलना की थी।
उनके अनुसार, मायावती सरकार में कैबिनेट बैठकें काफी कम समय में पूरी हो जाती थीं। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में भी बैठकों की अवधि अपेक्षाकृत छोटी होती थी।
इसके उलट, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रियों को अपने विभागों की योजनाओं और कामकाज की विस्तृत प्रस्तुतियां देनी पड़ती थीं।
बघेल ने कहा था कि इन प्रस्तुतियों के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को देर रात तक बैठना पड़ता था।
ये आंकड़े बघेल के व्यक्तिगत अनुभव और बयान पर आधारित हैं, न कि तीनों सरकारों की समस्त कैबिनेट बैठकों का आधिकारिक समय-संबंधी रिकॉर्ड।
Yogi Cabinet Meeting: मायावती सरकार में कितनी देर होती थी कैबिनेट बैठक?
एसपी सिंह बघेल के अनुसार, मायावती के मुख्यमंत्री रहते कैबिनेट की बैठकें कई बार साढ़े तीन से सात मिनट में समाप्त हो जाती थीं।
उन्होंने यह बात तीनों मुख्यमंत्रियों की कार्यप्रणाली में अंतर समझाते हुए कही थी।
मायावती चार अलग-अलग अवधियों में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। उनका सबसे लंबा लगातार कार्यकाल वर्ष 2007 से 2012 तक रहा।
बघेल का बयान इसी राजनीतिक अनुभव से जुड़ा बताया जाता है। हालांकि, उन्होंने जिन बैठकों की अवधि बताई, उनकी तारीखों या आधिकारिक कार्यवृत्त का स्वतंत्र रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि मायावती के पूरे शासनकाल में हर कैबिनेट बैठक केवल साढ़े तीन मिनट चली।
Yogi Cabinet Meeting: मुलायम सिंह यादव के दौर में 15 मिनट की बैठक?
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल को लेकर भी एसपी सिंह बघेल ने इसी तरह की तुलना की थी।
बघेल के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव की सरकार में कैबिनेट की बैठक लगभग 15 मिनट तक चलती थी।
मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी सरकार की बैठकों को लेकर बघेल ने जो समय बताया, वह पूर्व मंत्री के अनुभव पर आधारित तुलना है।
यहां भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कैबिनेट बैठकों की अवधि से अकेले किसी सरकार की प्रशासनिक गुणवत्ता या निर्णयों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
किसी बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रकृति, तैयारी, विभागीय प्रक्रिया और उनके क्रियान्वयन जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं।
योगी सरकार में शाम 6 बजे शुरू होती थीं प्रस्तुतियां
19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
सरकार गठन के शुरुआती दौर में उन्होंने अलग-अलग विभागों के कामकाज, योजनाओं और प्रस्तावित सुधारों की समीक्षा के लिए प्रस्तुतियां आयोजित कराईं।
लेखक शांतनु गुप्ता की पुस्तक में बताया गया है कि इन प्रस्तुतियों के लिए शाम छह बजे का समय निर्धारित किया गया था।
बैठकों में संबंधित मंत्री के साथ उनके विभाग के अधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते थे।
विभागों को अपनी प्राथमिकताओं, योजनाओं, बजट, भविष्य की चुनौतियों और संभावित समाधान के बारे में जानकारी देनी होती थी।
इन बैठकों का उद्देश्य मंत्रियों और अधिकारियों को सरकार की योजनाओं तथा प्रशासनिक प्राथमिकताओं से परिचित कराना था।
Yogi Cabinet Meeting Timing: आधी रात तक बैठते थे मंत्री
योगी सरकार के शुरुआती दिनों की विभागीय प्रस्तुतियों से जुड़ा सबसे चर्चित पहलू उनका लंबा समय था।
बघेल ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि शायद मंत्रियों ने लगातार दो फिल्मों के शाम छह और नौ बजे वाले शो भी नहीं देखे होंगे, लेकिन यहां उन्हें लगभग एक महीने तक शाम छह बजे से रात 12 बजे तक बैठना पड़ा।
उनके मुताबिक, इन बैठकों के दौरान मंत्रियों को अपने विभाग के अलावा दूसरे विभागों की योजनाओं और समस्याओं को भी समझने का अवसर मिला।
सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना भी इन प्रस्तुतियों का एक उद्देश्य बताया गया।
वर्ष 2017 की समकालीन रिपोर्टों में भी योगी आदित्यनाथ की देर शाम होने वाली विभागीय समीक्षाओं और अधिकारियों के लंबे कार्यदिवस का उल्लेख मिलता है।
Yogi Cabinet Meeting: मंत्री देते थे अपने विभाग का पूरा हिसाब
योगी सरकार की शुरुआती समीक्षा बैठकों में मंत्रियों को विभागीय योजनाओं की जानकारी विस्तार से देने को कहा गया था।
इस दौरान विभाग का बजट, जारी परियोजनाएं, नई योजनाएं और प्रशासनिक चुनौतियां चर्चा का हिस्सा बनती थीं।
मुख्यमंत्री स्वयं प्रस्तुतियां सुनते और संबंधित विषयों पर अधिकारियों से जानकारी लेते थे।
शांतनु गुप्ता की पुस्तक में इन बैठकों को योगी सरकार की शुरुआती प्रशासनिक कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
इनका एक उद्देश्य विभिन्न विभागों के मंत्रियों को एक-दूसरे के कामकाज से परिचित कराना भी था।
हालांकि, लंबी बैठकें कितने बेहतर प्रशासनिक परिणाम देती हैं, इसका मूल्यांकन केवल बैठक के समय के आधार पर नहीं किया जा सकता। योजनाओं की प्रगति और उनके परिणाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
Yogi Cabinet Meeting: मायावती और योगी की कार्यशैली पर बघेल ने क्या कहा?
एसपी सिंह बघेल ने अपने अनुभव के आधार पर मायावती और योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली में एक और अंतर बताया था।
उनका दावा था कि मायावती सरकार के दौरान कई विधायकों के लिए मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात करना आसान नहीं होता था।
वहीं योगी सरकार के शुरुआती दौर में विधायकों और सांसदों से मुलाकात के लिए अलग समय निर्धारित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
बघेल ने इसे जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद की अलग व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया।
हालांकि, ये टिप्पणियां बघेल के निजी राजनीतिक अनुभव को दर्शाती हैं। इन्हें दोनों सरकारों की समग्र प्रशासनिक कार्यशैली का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं माना जाना चाहिए।
किताब में लखनऊ के कैंसर अस्पताल का भी जिक्र
The Monk Who Became Chief Minister में योगी सरकार के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक अस्पताल का किस्सा भी बताया गया है।
पुस्तक के अनुसार, मुख्यमंत्री के जनता दरबार में एक कैंसर मरीज इलाज के लिए सहायता मांगने पहुंचा था।
इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकार के समय उद्घाटित एक कैंसर अस्पताल में मरीज को भेजने की संभावना पर विचार किया।
पुस्तक में दावा किया गया है कि जब संबंधित मंत्री अस्पताल की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे, तो वहां पर्याप्त उपचार उपकरण, डॉक्टर और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
किताब के मुताबिक, अस्पताल में रखे गए कुछ बिस्तर दूसरी चिकित्सा संस्था से लाए गए थे।
हालांकि, इस विशिष्ट घटनाक्रम और अस्पताल की तत्कालीन वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे लेखक द्वारा पुस्तक में प्रस्तुत विवरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
The Monk Who Became Chief Minister किताब किसने लिखी?
The Monk Who Became Chief Minister के लेखक शांतनु गुप्ता हैं।
यह पुस्तक सितंबर 2017 में ब्लूम्सबरी पब्लिशिंग से प्रकाशित हुई थी। इसमें योगी आदित्यनाथ के शुरुआती जीवन, गोरखनाथ मठ से जुड़ाव, संसदीय राजनीति और मुख्यमंत्री बनने तक के राजनीतिक सफर का विवरण दिया गया है।
पुस्तक में उनके करीबी लोगों, राजनीतिक सहयोगियों और अन्य स्रोतों के जरिए उनके जीवन तथा कार्यशैली को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
यह एक जीवनी है, सरकारी प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं। इसलिए इसमें दर्ज राजनीतिक दावों और घटनाओं को पढ़ते समय स्रोतों और उपलब्ध स्वतंत्र प्रमाणों का ध्यान रखना जरूरी है।
Yogi Cabinet Meeting Timing की बड़ी बातें
- एसपी सिंह बघेल के अनुसार, मायावती सरकार में कैबिनेट बैठकें साढ़े तीन से सात मिनट तक चलती थीं।
- बघेल ने मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल की बैठकों की अवधि लगभग 15 मिनट बताई।
- योगी सरकार के शुरुआती दौर में शाम छह बजे विभागीय प्रस्तुतियां शुरू होती थीं।
- कुछ प्रस्तुतियां रात 12 बजे तक चलने का उल्लेख मिलता है।
- इन बैठकों में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते थे।
- विभागीय योजनाओं, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं की समीक्षा की जाती थी।
- यह तुलना कैबिनेट बैठकों और विभागीय प्रस्तुतियों के बीच है, जो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
क्या लंबी कैबिनेट बैठक बेहतर सरकार की पहचान है?
Yogi Cabinet Meeting Timing को लेकर सामने आई यह तुलना उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों की अलग-अलग प्रशासनिक शैलियों की चर्चा करती है।
मायावती और मुलायम सिंह यादव की बैठकों का समय एसपी सिंह बघेल ने अपने अनुभव के आधार पर बताया था। वहीं योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में छह घंटे तक चलने वाली बैठकों का उदाहरण मुख्य रूप से विभागीय प्रस्तुतियों से संबंधित है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि योगी सरकार की हर कैबिनेट बैठक छह घंटे चलती थी।
किसी भी सरकार की कार्यप्रणाली का वास्तविक आकलन उसके निर्णयों, योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक जवाबदेही और जनता पर उनके प्रभाव के आधार पर किया जा सकता है।

