भारतीय रेलवे ने 40 घंटे से ज्यादा समय तक सफर करने वाली 11 लंबी दूरी की ट्रेनों में सफाई और रखरखाव की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेनों में हर दो घंटे में कचरा इकट्ठा करने, कोच और टॉयलेट की टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें लेने और रास्ते में ही छोटी-मोटी तकनीकी समस्याएं ठीक करने पर जोर दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने 3 अक्टूबर को संबंधित जोन को इस बारे में निर्देश जारी किए हैं।
रेलवे का कहना है कि अब केवल शुरुआती स्टेशन पर ट्रेन साफ करके रवाना करने पर फोकस नहीं रहेगा, बल्कि गंतव्य तक पूरी यात्रा के दौरान Train Cleanliness और यात्री सुविधाओं को बनाए रखना लक्ष्य होगा।
किन 11 ट्रेनों पर रहेगी खास नजर?
रेलवे बोर्ड ने लंबी यात्रा और अधिक turnaround time वाली इन 11 ट्रेनों को विशेष निगरानी के लिए चुना है:
- 22503/04 Vivek Express – डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी
- 15909/10 Awadh Assam Express – डिब्रूगढ़ से लालगढ़
- 01665/66 RKMP-Agartala Express
- 19483/84 Ahmedabad-Saharsa Express
- 22365/66 Danapur-SMVT Bengaluru Express
- 11401/02 Pune-SOU Express
- 15707/08 Amrapali Express – कटिहार से अमृतसर
- 11077/78 Jhelum Express – पुणे से जम्मू तवी
- 13201/02 Rajgir-LTT Express
- 22831/32 Howrah-Yesvantpur Express
- 12203/04 Amritsar-Saharsa Garib Rath
इनमें सबसे लंबी दूरी तय करने वाली Dibrugarh-Kanyakumari Vivek Express करीब 4,158 किलोमीटर का सफर करती है और इसका rake turnaround time करीब 170 घंटे है।
हर दो घंटे में कचरा इकट्ठा करने की निगरानी
नई व्यवस्था में On Board Housekeeping Service यानी OBHS के तहत कोचों से हर दो घंटे में कचरा इकट्ठा करने पर खास नजर रखी जाएगी।
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इकट्ठा किया गया कचरा निर्धारित disposal point पर ही उतारा जाए और उसे रेलवे ट्रैक के किनारे न फेंका जाए।
रेलवे में OBHS पहले से लंबी दूरी की बड़ी संख्या में ट्रेनों में उपलब्ध है। जुलाई 2026 में रेल मंत्रालय ने बताया था कि करीब 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध है।
कोच और टॉयलेट की ली जाएंगी टाइम-स्टैम्प तस्वीरें
Train Cleanliness की निगरानी में अब फोटो रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा।
अधिकारियों को ट्रेन के शुरुआती स्टेशन, गंतव्य और निर्धारित en-route inspection points पर कोच तथा शौचालयों की time-stamped photographs लेनी होंगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि यात्रा के किस चरण में सफाई का स्तर खराब हुआ।
यानी अगर किसी ट्रेन में शुरुआत में टॉयलेट साफ था लेकिन बाद में शिकायतें बढ़ीं, तो रेलवे के पास अलग-अलग स्टेशनों का visual record मौजूद होगा।
रास्ते में ही ठीक होंगी छोटी खराबियां
नई व्यवस्था सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है।
रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया है कि छोटी maintenance problems को ट्रेन के अंतिम स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार किए बिना रास्ते में ही ठीक किया जाए।
इसके लिए Clean Train Station यानी CTS points पर जरूरी manpower, tools और material उपलब्ध कराने को कहा गया है।
जरूरत पड़ने पर plumber, electrician और दूसरे maintenance कर्मचारियों की टीमें तैयार रखी जा सकती हैं, ताकि ट्रेन के स्टेशन पहुंचते ही खराबी ठीक की जा सके।
Clean Train Stations की जिम्मेदारी बढ़ेगी
Indian Railways की Clean Train Station Scheme के तहत चुनिंदा बड़े स्टेशनों पर ट्रेन के ठहराव के दौरान कोच, washbasin और toilets की सफाई की जाती है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक जुलाई 2026 तक देश में 63 Clean Train Stations के जरिए करीब 2,800 ट्रेनों को कवर किया जा रहा था।
अब इन CTS points पर लंबी दूरी की चुनी गई 11 ट्रेनों के लिए पर्याप्त कर्मचारी, सफाई सामग्री और उपकरण उपलब्ध रखने पर खास जोर रहेगा।
Rail Madad की शिकायतें तय करेंगी एजेंसियों का प्रदर्शन
यात्रियों की शिकायतों को भी अब ज्यादा महत्व दिया जाएगा।
Railway Board के मुताबिक Rail Madad के जरिए दर्ज होने वाली गंदे कोच, टॉयलेट और दूसरी सफाई संबंधी शिकायतों को housekeeping agencies और जिम्मेदार रेलवे अधिकारियों के performance assessment से जोड़ा जाएगा।
OBHS की जानकारी CMM portal पर Rail Madad के साथ integrate की गई है, जिससे शिकायत का पता लगाना और यह देखना आसान होगा कि किस agency या अधिकारी की जिम्मेदारी थी।
हर सप्ताह होगी समीक्षा
Zonal Railway के अधिकारी इन ट्रेनों में सफाई और यात्री शिकायतों की weekly review करेंगे।
इसके अलावा Divisional Railway Managers को अपने क्षेत्र से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। बार-बार एक जैसी शिकायत मिलने पर केवल सफाई कराने की बजाय उसका root cause पता लगाकर स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों चुनी गईं लंबी दूरी की ट्रेनें?
40 घंटे या उससे ज्यादा समय तक चलने वाली ट्रेनें कई दिनों तक लगातार सेवा में रहती हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान कचरा बढ़ना, toilet खराब होना या पानी, बिजली और दूसरी coach amenities में छोटी समस्याएं आना संभव है।
Railway Board का मानना है कि अगर इन समस्याओं को समय पर दूर नहीं किया गया तो लंबी यात्रा करने वाले यात्रियों के अनुभव पर ज्यादा असर पड़ता है।
इसी वजह से रेलवे अब शुरुआती स्टेशन की सफाई के बजाय पूरे सफर में Train Cleanliness बनाए रखने पर फोकस कर रहा है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
नई निगरानी व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है तो यात्रियों को मुख्य रूप से तीन फायदे मिल सकते हैं—टॉयलेट और कोच की नियमित सफाई, कचरे का जल्दी निपटारा और यात्रा के दौरान ही छोटी तकनीकी खराबियों का समाधान।
साथ ही time-stamped photos और Rail Madad complaints की tracking से यह पता लगाना आसान होगा कि किसी लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
रेलवे की यह पहल फिलहाल 11 लंबी दूरी की ट्रेनों पर खास निगरानी के साथ शुरू की गई है। इसका मुख्य लक्ष्य साफ है—ट्रेन केवल स्टेशन से निकलते समय साफ न हो, बल्कि कई दिनों की यात्रा के बाद गंतव्य तक भी सफाई और सुविधाओं का स्तर बना रहे।

