Agra Congress Protest: आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन और गेट-दीवार पर काले रंग से नारे लिखने के मामले में गिरफ्तार छह कांग्रेस कार्यकर्ता जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गए हैं। रविवार सुबह रिहाई के दौरान जिला जेल के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे। नेताओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और नारेबाजी शुरू हुई। इसके बाद जुलूस निकालने की कोशिश को लेकर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने भीड़ को वहां से हटाकर नेताओं को वाहनों से रवाना कराया।
यह मामला 28 सितंबर 2026 को आगरा की विजय नगर कॉलोनी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर किया गया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान घर के गेट और बाहरी हिस्से पर काले रंग से आपत्तिजनक नारे लिखे गए और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
Agra Congress Protest: जेल से बाहर आते ही स्वागत
Agra Congress Protest मामले में गिरफ्तार कांग्रेस नेताओं को शनिवार को अदालत से जमानत मिली थी। इसके बाद रविवार सुबह जब नेता आगरा जिला जेल से बाहर निकले तो समर्थक बड़ी संख्या में जेल के बाहर जमा हो गए।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं ने रिहा नेताओं को फूल-मालाएं पहनाईं और उनके समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता जुलूस निकालने की तैयारी करने लगे, जिस पर वहां मौजूद पुलिस ने आपत्ति जताई। हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को हटाया। इस दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
मौके पर पहले से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात था, ताकि रिहाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
Agra Congress Protest: छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मिली जमानत
आगरा की अदालत ने मामले में गिरफ्तार छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक इनमें:
- अनिल यादव
- मुकेश धनगर
- राजेश कुमार
- मनोज गौड़
- राजेश गौतम
- पंकज चौधरी
शामिल हैं। सभी को ₹20,000-₹20,000 के surety bond पर जमानत देने की जानकारी सामने आई है।
इन नेताओं को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
Agra Congress Protest: हत्या के प्रयास की धारा पर कोर्ट ने उठाए सवाल
Agra Congress Protest मामले में सबसे अहम कानूनी घटनाक्रम हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा को लेकर सामने आया।
पुलिस ने FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 समेत कई गंभीर धाराएं लगाई थीं। अदालत ने पिछली सुनवाई में जांच अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि हत्या के प्रयास की धारा किन चोटों, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों या दूसरे सबूतों के आधार पर लगाई गई है।
पुलिस निर्धारित समय तक इस आरोप को पर्याप्त साक्ष्यों से पुष्ट नहीं कर सकी। इसके बाद हत्या के प्रयास से संबंधित धारा हट गई और अदालत ने छह आरोपियों की जमानत स्वीकार कर ली।
अमर उजाला की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अदालत ने धारा 109(2) के साथ सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने से जुड़ी धारा 121(2) हटाने की बात कही।
हालांकि मामले की बाकी धाराओं में कानूनी कार्यवाही जारी है। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।
Agra Congress Protest: 28 सितंबर को क्या हुआ था?
पूरा विवाद 28 सितंबर को शुरू हुआ था।
कांग्रेस के प्रदेश संगठन से जुड़े नेता अनिल यादव और मथुरा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह आगरा की विजय नगर कॉलोनी पहुंचा था। यहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पैतृक आवास है।
कांग्रेस कार्यकर्ता SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने आवास के मुख्य गेट और दीवार पर काले रंग से आपत्तिजनक शब्द लिखे और नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए थे।
Agra Congress Protest: पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा
घटना के बाद आगरा के हरीपर्वत थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
अलग-अलग रिपोर्टों में नामजद और अज्ञात आरोपियों की संख्या को लेकर मामूली अंतर है, लेकिन FIR में कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नामजद करने के साथ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था।
पुलिस ने जिन धाराओं में मामला दर्ज किया था, उनमें कथित तौर पर:
- सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा
- गलत तरीके से रोकना
- सरकारी कर्मचारी पर बल प्रयोग
- घर में अनधिकृत प्रवेश
- आपराधिक धमकी
- उपद्रव
- हत्या के प्रयास
से जुड़ी धाराएं शामिल थीं।
हत्या के प्रयास वाली धारा बाद में पर्याप्त आधार न मिलने पर हटा दी गई।
जेल से निकलने के बाद क्यों हुआ हंगामा?
Agra Congress Protest का नया विवाद नेताओं की रिहाई के बाद शुरू हुआ।
रविवार सुबह कांग्रेस नेता जब जेल से निकले तो समर्थकों ने उनका स्वागत करते हुए नारे लगाए। कार्यकर्ता वहां से जुलूस निकालना चाहते थे।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जुलूस निकालने पर आपत्ति जताई और लोगों को वहां से हटने के लिए कहा।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। आखिरकार पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाया और रिहा नेताओं को वाहनों में बैठाकर रवाना किया।
अनिल यादव ने पुलिस पर लगाए आरोप
रिहाई के बाद कांग्रेस नेता अनिल यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार पुलिस के जरिए विपक्ष की आवाज दबा रही है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार है।
वहीं मुकेश धनगर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध आगे भी जारी रहेगा। ये दोनों बयान कांग्रेस नेताओं का राजनीतिक पक्ष हैं।
Agra Congress Protest: कांग्रेस ने जमानत को बताया ‘न्याय की जीत’
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की ओर से भी नेताओं को मिली जमानत पर प्रतिक्रिया आई है।
कांग्रेस नेताओं ने हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा हटने को अपनी राजनीतिक और कानूनी जीत के तौर पर पेश किया। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना अभियान जारी रखेगी।
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति रिहायशी इलाके में प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के आरोपों की जांच जारी है।
देश के कई हिस्सों में CEC के खिलाफ प्रदर्शन
Agra Congress Protest को देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर चल रहे बड़े राजनीतिक विरोध की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
हाल के दिनों में दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। दिल्ली में भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। चुनाव आयोग पर विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि आयोग अपनी प्रक्रिया को मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की कवायद बताता रहा है।
इन राजनीतिक आरोपों को साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि किसी सक्षम जांच या अदालत में उनकी पुष्टि न हो।
Agra Congress Protest की बड़ी बातें
- मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास से जुड़ा है।
- 28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहां SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
- गेट और बाहरी दीवार पर काले रंग से नारे लिखने का आरोप है।
- मामले में छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
- शनिवार को सभी छह को अदालत से जमानत मिल गई।
- हत्या के प्रयास की धारा पर्याप्त आधार न मिलने पर हटा दी गई।
- रविवार सुबह रिहाई के बाद समर्थकों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया।
- कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालने की कोशिश की।
- पुलिस ने जुलूस रोककर भीड़ को वहां से हटाया।
- इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
- कांग्रेस नेताओं ने पुलिस और राज्य सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
- मामले की बाकी धाराओं में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
अब आगे क्या?
Agra Congress Protest मामले में छह नेताओं की रिहाई के बाद तत्काल कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन केस खत्म नहीं हुआ है। हत्या के प्रयास की धारा हटने के बावजूद FIR की दूसरी धाराओं में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।
वहीं जेल से रिहाई के बाद जुलूस को लेकर हुई पुलिस-कांग्रेस नोकझोंक ने इस मामले को दोबारा राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के खिलाफ उसका विरोध जारी रहेगा।
अब नजर पुलिस जांच, चार्जशीट और अदालत की आगे की कार्रवाई पर रहेगी।

