Election Commission Controversy को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से SIR, EVM और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की आलोचना किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पलटवार किया है। अजय राय ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के प्रवक्ता नहीं हैं और आयोग से जुड़े सवालों का जवाब संबंधित संवैधानिक संस्था को ही देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग और BJP के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। ये कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े उसके अंतिम फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति प्राप्त थी।
Election Commission Controversy पर अजय राय ने क्या कहा?
Election Commission Controversy पर अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के अपने अधिकारी और प्रवक्ता हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को उसकी तरफ से बोलने की जरूरत नहीं है।
राय ने सवाल उठाया कि BJP और चुनाव आयोग के बीच संबंधों को लेकर विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, उस पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के चुनाव आयोग के बचाव को लेकर भी आपत्ति जताई।
अजय राय और कांग्रेस इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। 25 सितंबर को लखनऊ में कांग्रेस ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान अजय राय समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया था।
Election Commission Controversy: CM योगी ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
अजय राय का बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया। योगी ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग और SIR को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव जीतने पर नतीजों को स्वीकार करता है, लेकिन हार की स्थिति में EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है। योगी ने राहुल गांधी की EVM को “ब्लैक बॉक्स” बताने वाली पुरानी टिप्पणी का भी उल्लेख किया।
योगी का तर्क था कि इसी EVM आधारित चुनावी व्यवस्था के जरिए कांग्रेस की केंद्र और राज्यों में सरकारें बनी हैं, इसलिए चुनाव परिणाम प्रतिकूल होने पर मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। यह मुख्यमंत्री और BJP का राजनीतिक पक्ष है।
Election Commission Controversy: SIR पहली बार नहीं हुआ: योगी
Election Commission Controversy के बीच मुख्यमंत्री योगी ने SIR को लेकर भी विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का intensive revision पहली बार नहीं हो रहा है।
योगी ने अपने बयान में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में हुए पुनरीक्षणों का जिक्र किया और कहा कि इनमें से अधिकांश अवधि में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उन्होंने कहा कि इस बार SIR को लेकर विपक्ष का विरोध उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, उनके लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
Election Commission Controversy: चुनाव आयोग ने SIR पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद विस्तृत बयान जारी किया।
आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी SIR आदेश को तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति प्राप्त थी। बाद में अलग-अलग राज्यों के लिए जारी SIR schedules भी unanimous approval से जारी किए गए।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान छूटे किसी पात्र मतदाता को continuous updation के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए संबंधित Electoral Registration Officer के पास आवेदन करने का अधिकार है।
SIR नोटिस की प्रक्रिया में किया बदलाव
Election Commission Controversy के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए कुछ नए निर्देश भी जारी किए हैं।
आयोग के मुताबिक SIR के दौरान “unmapped” या “logical discrepancy” के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर अब Booth Level Officer यानी BLO जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
केवल विशेष परिस्थितियों में सुनवाई होगी और आयोग ने ऐसी सुनवाई को जहां संभव हो ऑनलाइन करने की बात कही है। मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी अधिकृत कर सकता है।
आयोग ने गरीब, मजदूर, बेघर और night shelters में रहने वाले लोगों के लिए help desk और विशेष शिविर लगाने के भी निर्देश दिए हैं।
Election Commission Controversy: चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर क्यों मचा विवाद?
मौजूदा Election Commission Controversy की एक बड़ी वजह मीडिया में आई वह रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग 10 महीनों में कुछ मामलों में कम से कम 14 बार आपत्तियां या अलग राय दर्ज की थीं।
इसी रिपोर्ट के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। योगी आदित्यनाथ ने इन मांगों को खारिज करते हुए कांग्रेस और सहयोगी दलों से माफी मांगने को कहा।
चुनाव आयोग का पक्ष है कि किसी प्रस्ताव पर शुरुआती स्तर पर अलग-अलग राय सामने आ सकती है, लेकिन SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने 26 सितंबर के आधिकारिक बयान में भी इस स्थिति को दोहराया।
अजय राय बनाम योगी के बयान से बढ़ी सियासी बहस
अब Election Commission Controversy पर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अजय राय और कांग्रेस चुनाव आयोग से मतदाता सूची और SIR से जुड़े सवालों पर अधिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
दोनों पक्षों के राजनीतिक आरोपों से अलग चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं और पात्र मतदाताओं के लिए सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया जारी है।
ऐसे में SIR को लेकर आगे की स्थिति चुनाव आयोग के आधिकारिक डेटा, final electoral rolls और अदालतों में चल रही संबंधित कानूनी प्रक्रिया से और स्पष्ट होगी।
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